अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार शाम (18 नवंबर) को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया। कुछ घंटे बाद ही एक दिल्ली अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए उन्हें 13 दिन की ED कस्टडी में भेज दिया। अदालत ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और कई पहलुओं की पड़ताल बाकी है।
ED ने अदालत को बताया कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने झूठे दावे करके छात्रों और उनके परिवारों से लगभग ₹415 करोड़ की रकम वसूली। एजेंसी का कहना है कि विश्वविद्यालय ने फर्जी मान्यता और गलत जानकारी का इस्तेमाल कर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया और भारी मुनाफा कमाया। जांच अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने खुद को NAAC से मान्यता प्राप्त और UGC के सेक्शन 12(B) के तहत मान्य बताकर छात्रों को आकर्षित किया। जबकि ED का दावा है कि यह दोनों दावे गलत थे।
इन भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा कर कई छात्र व अभिभावक अपना समय, मेहनत और जीवनभर की बचत लगाते रहे। जब सच्चाई सामने आई, तो कई डिग्रियां बेकार हो गईं, जिससे छात्रों के करियर पर गहरा असर पड़ा।
ED ने दिल्ली-एनसीआर में अल फ़लाह समूह से जुड़े 25 ठिकानों पर छापे मारे। जांच की शुरुआत दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की दो FIR पर आधारित थी। यूनिवर्सिटी से सबंधित तीन डॉक्टर्स के फरीदाबाद आतंकवाद मॉड्यूल के तहत बॉम्ब ब्लास्ट के लिए चर्चा में आई। इसी घटना की समीक्षा के लिए हुई बैठक में गृहमंत्री अमित शाह ने लीड किया, ED को आर्थिक लेनदेन की गहन जांच का निर्देश दिया गया था।
ED ने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी चलाने वाला अल फ़लाह चैरिटेबल ट्रस्ट फीस और अन्य स्रोतों से प्राप्त ₹415.10 करोड़ को अपराध से अर्जित धन मानता है। एजेंसी के मुताबिक, इस रकम का एक हिस्सा निजी उपयोग में भी लगाया गया। अदालत में ED का प्रतिनिधित्व कर रहे विशेष लोक अभियोजक साइमन बेंजामिन ने कहा कि झूठे दावों ने हजारों छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचाया, जबकि संस्था लगातार नए एडमिशन लेती रही और भारी रकम इकट्ठा करती रही।
जांच के दौरान ED ने नौ शेल कंपनियों की पहचान की है, जो अल फ़लाह समूह के इसी पते पर रजिस्टर्ड पाई गईं। अब इन कंपनियों की भूमिका, फंड मूवमेंट और संभावित फर्जी लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। अल फ़लाह यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई से जुड़े आर्थिक, कानूनी और सुरक्षा पहलुओं ने अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ED आने वाले दिनों में फंड ट्रेल, शेल नेटवर्क और संभावित आतंक वित्त पोषण संबंधों की जांच और आगे बढ़ाने वाली है।
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