लाल किला ब्लास्ट केस में नया खुलासा; यहूदी मालिकी की कॉफी चेन को निशाना बनाने की थी साजिश!

गाजा युद्ध को लेकर ‘संदेश’ देना चाहते थे आरोपी

लाल किला ब्लास्ट केस में नया खुलासा; यहूदी मालिकी की कॉफी चेन को निशाना बनाने की थी साजिश!

New revelation in the Red Fort blast case; the plot was to target a coffee chain owned by a Jewish owner!

पिछले वर्ष 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के करीब हुए कार ब्लास्ट मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले के पीछे सक्रिय तथाकथित व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल एक वैश्विक कॉफी चेन को निशाना बनाने की योजना बना रहा था, जिसके मालिक यहूदी समुदाय से हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस हमले के पीछे का मकसद इज़रायली सेना को गाजा में चल रहे युद्ध को लेकर एक संदेश देना था।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आतंकी मॉड्यूल पिछले चार वर्षों से सक्रिय था और कॉफी चेन के कई आउटलेट्स पर हमले की तैयारी कर रहा था। इस मॉड्यूल में शामिल कई आरोपी पेशे से डॉक्टर हैं। दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया। एनआईए अब तक इस केस में नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

निशाने को लेकर मतभेद:

जांच से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर नबी और उसके अन्य सहयोगी मुज़ामिल अहमद गनई, आदिल अहमद राथर और उत्तर प्रदेश की शाहीन सईद के बीच हमले के संभावित लक्ष्यों को लेकर मतभेद उभर आए थे। जहां कुछ आरोपी यहूदी मालिक वाली कॉफी चेन पर हमले के पक्ष में थे, वहीं अन्य सदस्य केवल जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने तक सीमित रहना चाहते थे।

रिपोर्ट में कहा गया,“आरोपी ऑनलाइन वीडियो देखते थे और शुरू से बम बनाने का इरादा रखते थे। इसी वजह से उनके पास से हजारों किलो यूरिया की बोरियां बरामद की गईं। उन्होंने अलग-अलग रसायनों को मिलाकर कई प्रयोग किए, ताकि बम स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री से तैयार किए जा सकें और किसी तरह के संदेह के संकेत न मिलें।”

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह समूह अल-कायदा की भारतीय शाखा अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) को फिर से सक्रिय करने की योजना पर काम कर रहा था। इस संगठन की स्थापना ज़ाकिर मूसा ने की थी, जिसे 2019 में सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। 2021 में संगठन के अंतिम कमांडर मुज़ामिल अहमद तंत्रे की मौत के बाद यह समूह निष्क्रिय हो गया था।

अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लगभग सभी आरोपी डॉक्टर हैं, जो अंसार गजवत-उल-हिंद को पुनर्जीवित कर भारत में इस्लामी क़ानून स्थापित करने की साजिश रच रहे थे।

गौरतलब है कि नवंबर में हुआ दिल्ली कार ब्लास्ट जम्मू-कश्मीर पुलिस की व्यापक जांच के बाद सामने आया था, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद से जुड़े आतंकी मॉड्यूल की पड़ताल की जा रही थी। अक्टूबर में श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पर्चे सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इस नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू किया, जिससे घबराकर फरार आतंकी उमर नबी ने लाल किले के करीब फिदायीन हमला किया।

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