यूरोप की हर प्याली में परोसी जाएगी आसाम की चाय: अमित शाह

भारत-ईयू मुक्त व्यापर समझौता अब है चुनावी मुद्दा

यूरोप की हर प्याली में परोसी जाएगी आसाम की चाय: अमित शाह

Assam tea will be served in every cup across Europe: Amit Shah

आसाम विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होने के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को राज्य की चाय अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए बड़ा चुनावी संदेश दिया है। शुक्रवार (30 जनवरी) को डिब्रूगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए के बाद असम की चाय बिना किसी शुल्क के यूरोप के बाजारों तक पहुंचेगी और यूरोप के 27 देशों की हर प्याली में असम की चाय होगी।

डिब्रूगढ़ आसाम के सबसे बड़े चाय उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, वहां खानिकर परेड ग्राउंड में आयोजित रैली में शाह ने कहा कि “कुछ दिन पहले भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए पर मुहर लगी है और इसका सबसे बड़ा लाभ असम, विशेषकर डिब्रूगढ़ को मिलेगा। “इस समझौते के बाद आसाम के चाय बागानों से निकलने वाली चाय सीधे यूरोप के लोगों की सुबह की चाय बनेगी। यह हमारे चाय उत्पादकों और निर्यातकों के लिए एक विशाल बाजार खोलेगा।”

अमित शाह ने इस समझौते का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक करार ने आसाम की चाय को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि शून्य शुल्क व्यवस्था से चाय की लागत घटेगी, निर्यात बढ़ेगा और किसानों व बागान श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

आसाम में मार्च-अप्रैल के बीच विधानसभा चुनाव संभावित हैं और डिब्रूगढ़ में यह रैली चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा डिब्रूगढ़ को राज्य दूसरी राजधानी के रूप में विकसित करने की परिकल्पना के तहत शाह ने करीब 825 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया, जिसमें नया विधानसभा परिसर शामिल है। इसे प्रशासन के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया।

राजनीतिक दृष्टि से अपर आसाम क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है, जहां चाय बागान समुदाय एक बड़ा मतदाता वर्ग है। इसके साथ ही अहोम समुदाय की भी इस क्षेत्र में निर्णायक भूमिका है। अहोम समुदाय सिवसागर, चराइदेव, जोरहाट, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, लखीमपुर, धेमाजी, सोनितपुर, बिस्वनाथ और नगांव जैसे जिलों में प्रमुख रूप से रहता है, जो आसाम के प्रमुख चाय उत्पादक जिले भी हैं।

पारंपरिक रूप से कांग्रेस समर्थक रहे अहोम समुदाय ने हाल के वर्षों में आर्थिक अवसरों और कल्याणकारी वादों के चलते भाजपा की ओर झुकाव दिखाया है। 2021 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने अपर असम में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की। 2024 के लोकसभा चुनाव में जोरहाट सीट को छोड़कर भाजपा ने पूरे अपर असम में जीत दर्ज की। जोरहाट सीट का प्रतिनिधित्व कांग्रेस नेता गौरव गोगोई करते हैं, जो स्वयं अहोम समुदाय से आते हैं।

असम ऑर्थोडॉक्स चाय को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त है और असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल उत्पादन का 52 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है। टी बोर्ड ऑफ इंडिया के अनुसार, 2024 में असम में लगभग 628 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ, जबकि 2025 में इसके करीब 650 मिलियन किलोग्राम तक पहुंचने का अनुमान है। जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों में असम की ऑर्थोडॉक्स ब्लैक टी की विशेष मांग है।

भारत-ईयू एफटीए 27 जनवरी को लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद अंतिम रूप दिया गया, हालिया वर्षों के सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। यह समझौता 2027 तक लागू हो सकता है और इसके तहत भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यातों पर शुल्क समाप्त होगा। आसाम की चाय के लिए इसका अर्थ है शून्य शुल्क के साथ यूरोपीय बाजारों में सीधी पहुंच, जिससे श्रीलंका, केन्या और चीन जैसे देशों से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा में असम की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

अपने संबोधन में अमित शाह ने चाय बागान श्रमिकों की भूमिका की भी सराहना की और कहा, “डिब्रूगढ़ को चाय की राजधानी कहा जाता है। यहां के श्रमिकों की मेहनत ने आसाम और भारत को दुनिया भर में चाय के लिए पहचान दिलाई है।”

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