अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलते ही वैश्विक बाजारों में तेज हलचल देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ हमलों पर दो सप्ताह के युद्धविराम (सीज़फायर) की घोषणा करते ही कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ी राहत मिली।
बुधवार (8 अप्रैल)को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 95.068 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जो इससे पहले 109.77 डॉलर के स्तर पर थी। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी करीब 20 डॉलर प्रति बैरल की तेज गिरावट देखी गई।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ खुलने से सप्लाई की उम्मीद
इस सीज़फायर का सीधा संबंध स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से है, जिसके दोबारा खुलने और ईरान का इसपर नियंत्रण होने की बात की गई है। यह संकीर्ण समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। पिछले कुछ हफ्तों से यहां तनाव के चलते तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित थी, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
अब ईरान की ओर से संकेत मिला है कि अगर हमले रुकते हैं, तो इस जलमार्ग से सुरक्षित आवागमन संभव होगा। इससे बाजार में भरोसा लौटा है और सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद जगी है।
28 फरवरी से अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद स्थिति बिगड़ गई थी। ईरान ने प्रभावी रूप से इस जलमार्ग को बंद कर दिया था, जिससे टैंकरों ने रास्ता बदल लिया और बीमा लागत बढ़ गई। सप्लाई की कमी के डर से मार्च में तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा उछाल आया, जो रिकॉर्ड स्तर था। इसका असर वैश्विक महंगाई पर भी पड़ने लगा था, जिससे कई देशों की सरकारें और कंपनियां दबाव में आ गई थीं।
सीज़फायर की घोषणा के बाद विभिन्न एसेट क्लास में तेज बदलाव देखने को मिला—
- सप्लाई संकट कम होने के संकेत मिलते ही कच्चे तेल में गिरावट आई
- अमेरिकी शेयर बाजार (S&P 500 फ्यूचर्स) में 2% से ज्यादा उछाल
- बॉन्ड मार्केट में तेजी, जिससे निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग घटी
- ऑस्ट्रेलियन डॉलर और यूरो में मजबूती, डॉलर की सुरक्षित मुद्रा के रूप में मांग कम हुई
- क्रिप्टोकरेंसी में भी तेजी, जिससे जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी
अभी भी बनी हुई है अनिश्चितता
हालांकि, यह सीज़फायर केवल दो सप्ताह के लिए है और इसकी सफलता ईरान के सैन्य बलों के सहयोग पर निर्भर करेगी। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते पर बातचीत जारी है और 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव व्यवहारिक नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार ने राहत की सांस ली है, लेकिन अगर बातचीत विफल होती है तो फिर से अस्थिरता लौट सकती है। कुल मिलाकर, इस अस्थायी सीज़फायर ने वैश्विक बाजारों को बड़ा सहारा दिया है, लेकिन स्थायी समाधान के बिना स्थिति अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।
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