मुंबई की प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) अदालत ने एक्सिस म्यूचुअल फंड के पूर्व फंड मैनेजर वीरेश जोशी की जमानत याचिका खारिज कर दी। जोशी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹91 करोड़ के फ्रंट-ट्रेडिंग घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया था। फ्रंट-ट्रेडिंग शेयर बाज़ार की एक अवैध हेरफेर तकनीक है, जिसमें आंतरिक गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग कर निजी मुनाफा कमाया जाता है।
जोशी के वकील मनन सांघी ने दलील दी कि जांच एजेंसियों ने कथित अवैध रकम पहले ही बरामद कर ली है, ऐसे में उनके मुवक्किल को जमानत मिलनी चाहिए।
हालांकि, ईडी के विशेष अभियोजक अरविंद अघाव ने इसका कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने कोर्ट में कहा कि जोशी, बतौर चीफ डीलर, एक्सिस म्यूचुअल फंड की गोपनीय नीतियों और निवेश योजनाओं की जानकारी रखते थे। उन्होंने इस भरोसे को तोड़ते हुए संवेदनशील जानकारी बाहर साझा की, जिससे कई निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
ईडी की चार्जशीट में दावा है कि जोशी ने अपने सहयोगी सुमित देसाई के जरिए ट्रेडिंग अकाउंट्स अरेंज किए और दुबई में एक बोल्ट टर्मिनल भी लगवाया। इसके लिए उन्होंने अपने एक दोस्त की मदद ली। जांच में सामने आया कि जोशी ने अज्ञात स्रोतों से ₹91 करोड़ अपने और अपने परिवार के खातों में प्राप्त किए।
एजेंसी ने कहा कि बैंक खातों की जांच से यह भी पता चला है कि इस घोटाले में कई लोग शामिल हैं और एक सिंडीकेट स्कीम के जरिए काले धन को अलग-अलग चैनलों से घुमाकर सफेद बनाने की कोशिश की गई। कोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता और वित्तीय अपराध के प्रभाव को देखते हुए जोशी को फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती। ईडी अब पूरे नेटवर्क की तहकीकात कर रही है, जिसमें विदेशी कनेक्शन की भी संभावना जताई जा रही है।
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