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Wednesday, November 4, 2026
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आयात-निर्यात में ‘प्रोविजनल असेसमेंट’ के नियम आसान, CBIC ने जारी किए नए प्रावधान!

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केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने मंगलवार (16 सितंबर) को कस्टम्स (फाइनलाइजेशन ऑफ प्रोविजनल असेसमेंट) रेगुलेशंस, 2025 अधिसूचित किए। इन प्रावधानों का उद्देश्य राजस्व संरक्षण, व्यापार को सुगम बनाना और वर्षों से लंबित मामलों को समाप्त करना है। नए नियमों के तहत आयातकों और निर्यातकों को आवश्यक दस्तावेज़ 15 दिन के भीतर जमा करने होंगे, जबकि विशेष परिस्थितियों में उन्हें दो महीने तक का अतिरिक्त समय दिया जा सकेगा।

कस्टम अधिकारियों को जांच 14 महीने के भीतर पूरी करनी होगी और प्रोविजनल असेसमेंट का अंतिम निपटारा दो साल के भीतर करना अनिवार्य होगा, हालांकि अपील, स्टे ऑर्डर या अंतरराष्ट्रीय सूचना अनुरोध जैसे मामलों को इससे बाहर रखा गया है। इसके अलावा, प्रोविजनल असेसमेंट चरण में स्वैच्छिक ड्यूटी भुगतान की अनुमति दी गई है, जिसे अंतिम असेसमेंट के समय एडजस्ट किया जाएगा। गैर-अनुपालन की स्थिति में ₹25,000 तक का जुर्माना और ब्याज देना होगा। साथ ही, रिफंड, ड्यूटी रिकवरी और बॉन्ड कैंसिलेशन की विस्तृत प्रक्रिया भी नए प्रावधानों में शामिल की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय कस्टम्स प्रशासन को तेज और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा। ग्रांट थॉर्नटन भारत के टैक्स विशेषज्ञ मनोज मिश्रा ने कहा, “कस्टम्स (फाइनलाइजेशन ऑफ प्रोविजनल असेसमेंट) रेगुलेशंस, 2025 लंबे समय से लंबित एक अहम सुधार है। स्पष्ट टाइमलाइन से व्यापार और प्रशासन दोनों के लिए पारदर्शिता और निश्चितता बढ़ेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि इससे कारोबारियों का कार्यशील पूंजी जल्दी रिलीज होगा, अनुपालन लागत घटेगी और सप्लाई चेन में स्थिरता आएगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि असली चुनौती क्रियान्वयन में होगी, खासकर उन मामलों में जो स्पेशल वैल्यूएशन ब्रांच की कार्यवाही, DRI जांच या लंबी मुकदमेबाजी से जुड़े हैं।

पुराने प्रोविजनल असेसमेंट सिस्टम की सबसे बड़ी खामी यह थी कि उसमें कोई तयशुदा समयसीमा नहीं थी। इस कारण व्यापारियों के मामलों का निपटारा वर्षों तक अटका रहता था और उनकी पूंजी लंबे समय तक फंसी रहती थी। कई बार जांच और मुकदमेबाजी इतनी लंबी खिंचती थी कि कारोबारियों को गहरी अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था। उद्योग जगत लंबे समय से मांग कर रहा था कि इस प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया जाए। नए नियम इस कमी को दूर करते हुए न केवल स्पष्ट टाइमलाइन तय करते हैं, बल्कि रिफंड और बॉन्ड कैंसिलेशन जैसी प्रक्रियाओं को भी सरल और तेज बनाने का प्रयास करते हैं।

इस प्रकार यह सुधार व्यापार और प्रशासन के बीच भरोसा बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय कस्टम्स प्रणाली को अधिक आधुनिक, सक्षम और व्यवसाय-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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