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Monday, June 8, 2026
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घरेलू LPG सिलेंडर हुआ महंगा, 29 रुपये बढ़ी कीमत

पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ी वैश्विक ऊर्जा कीमतें, सरकार ने कहा- उपभोक्ताओं को अब भी मिल रही राहत

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देश में घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। शनिवार(6 जून) से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि लागू हो गई है। इसके बाद दिल्ली में एक सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो चुकी है। पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 7 मार्च को सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे।

सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसी वजह से सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने बढ़ी कीमतों का बचाव करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को दुनिया के सबसे कम रसोई गैस दामों में से एक का लाभ मिल रहा है। मंत्रालय के अनुसार, 14.2 किलोग्राम के एक एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि दिल्ली में सामान्य उपभोक्ता को इसके लिए 942 रुपये ही चुकाने होंगे।

सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को पहले चार रीफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये की प्रत्यक्ष सब्सिडी मिलती रहेगी। इस योजना के तहत लाभार्थियों के लिए सिलेंडर की प्रभावी कीमत घटकर 642 रुपये रह जाती है।

मंत्रालय ने कहा कि गैर-उज्ज्वला उपभोक्ता भी बाजार आधारित वास्तविक कीमत की तुलना में लगभग 700 रुपये कम भुगतान कर रहे हैं। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का 60 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। इन आयातों की लागत सऊदी अरामको द्वारा निर्धारित सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (एससीपी) पर आधारित होती है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में एलपीजी का एससीपी लगभग 522 डॉलर प्रति टन था, जो पश्चिम एशिया में आपूर्ति संकट के बाद अप्रैल तक बढ़कर 775 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। यानी इसमें लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

सरकार का कहना है कि मौजूदा बढ़ोतरी वैश्विक कीमतों में हुई कुल वृद्धि का केवल एक छोटा हिस्सा है और शेष भार सरकारी तेल कंपनियां वहन कर रही हैं। आधिकारिक अनुमान के अनुसार, सरकारी तेल विपणन कंपनियां अभी भी प्रत्येक घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 600 से 700 रुपये तक का नुकसान उठा रही हैं। वर्ष 2025-26 में घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 41,338 करोड़ रुपये थी।

इस बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये की सहायता देने को मंजूरी दी है। एलपीजी के अलावा पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी हाल के महीनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का कहना है कि उसने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी ऊर्जा लागत का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है, जबकि विपक्ष इसे महंगाई बढ़ाने वाला कदम बता रहा है।

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