भारत यदि एक वर्ष तक सोना खरीदना बंद कर दे, तो कितने करोड़ रुपये की बचत होगी?

पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव के बीच मोदी की सोना खरीदने से बचने की अपील

भारत यदि एक वर्ष तक सोना खरीदना बंद कर दे, तो कितने करोड़ रुपये की बचत होगी?

If India stops buying gold for one year, how many crores of rupees will be saved?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 मई)को देशवासियों से सोना खरीदने, विदेश यात्रा और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को लेकर अपील की। इसके बाद ये मुद्दे पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए और बाजार में सोने से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में 12 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव से उत्पन्न ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से कम-से-कम एक वर्ष तक सोना न खरीदने, विदेश यात्राएं टालने और जहां संभव हो, घर से काम करने की अपील की। प्रधानमंत्री द्वारा सोना न खरीदने की अपील के पीछे क्या कारण है, यह फिलहाल सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

सोना न खरीदने का सीधा संबंध देश के विदेशी मुद्रा भंडार और रिजर्व फंड से है। आइए इसके पीछे का गणित समझते हैं। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 690.69 अरब डॉलर है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में यह भंडार लगभग 728 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण अप्रैल में यह घटकर करीब 691 अरब डॉलर रह गया।

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि वर्ष 2026 तक भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़कर 84.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 2 प्रतिशत होगा। बढ़ते चालू खाते के घाटे का मतलब है कि देश से बाहर जाने वाले डॉलर, देश में आने वाले डॉलर की तुलना में अधिक हो रहे हैं।

भारत के बढ़ते चालू खाते के घाटे के पीछे सोना एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 72 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदने वाला देश है। इस सोने का अधिकांश हिस्सा आयात किया जाता है और इसके भुगतान डॉलर में किए जाते हैं।

वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल आयात खर्च:

  • कुल आयात: 775 अरब डॉलर
  • कच्चे तेल का आयात: 134.7 अरब डॉलर
  • सोने का आयात: 72 अरब डॉलर
  • खाद्य तेल: 19.5 अरब डॉलर
  • उर्वरक: 14.5 अरब डॉलर
  • विदेशी मुद्रा भंडार: लगभग 691 अरब डॉलर (अप्रैल 2026)

आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल आयात में अकेले सोने की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत है। वहीं, ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 105 से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच उतार-चढ़ाव कर रही हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का 88 प्रतिशत आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर पहले से ही भारी दबाव है।

यदि देशवासी प्रधानमंत्री की अपील स्वीकार करते हैं और सोने की मांग कम होती है, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने पर पड़ेगा। यदि सोने का आयात केवल 30 से 40 प्रतिशत कम हो जाए, तो भारत लगभग 25 अरब डॉलर की बचत कर सकता है।यदि सोने के आयात में 50 प्रतिशत की कमी आती है, तो करीब 36 अरब डॉलर की बचत होगी। यदि देश एक वर्ष तक पूरी तरह सोना खरीदना बंद कर दे, तो लगभग 72 अरब डॉलर की बचत संभव है। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 6.84 लाख करोड़ रुपये के बराबर होगी।

यदि ऐसा होता है, तो भारत के चालू खाता घाटे (CAD) में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। यह बचत 2026 में अनुमानित 84.5 अरब डॉलर के चालू खाते के घाटे का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर सकती है। सरल शब्दों में कहें तो, सोने पर बचाए गए ये डॉलर कच्चे तेल, गैस और ऊर्जा से जुड़ी अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में उपयोग किए जा सकते हैं।

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