केंद्र सरकार ने शुक्रवार (24 अगस्त) को बताया कि बीते दस वर्षों में देश में मछली उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वर्ष 2013-14 में जहां कुल उत्पादन 96 लाख टन था, वहीं 2024-25 में यह 104 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 195 लाख टन तक पहुंच गया। इसमें सबसे तेज़ वृद्धि अंतर्देशीय मत्स्य पालन में दर्ज की गई, जो 61 लाख टन से बढ़कर 147.37 लाख टन तक पहुंच गया। मत्स्य विभाग के मुताबिक, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत अब तक 21,274.16 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। वहीं, प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना (PM-MKSSY) के तहत अप्रैल तक 11.84 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं।
29 जुलाई तक, 17,210.46 करोड़ रुपये के कुल निवेश से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भी समर्थन दिया गया है। इसके साथ ही, जून 2025 तक देशभर के मछुआरों और मछली पालकों को 4.76 लाख किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जारी किए जा चुके हैं, जिनसे 3,214.32 करोड़ रुपये का लोन वितरित हुआ।
अगस्त तक 26 लाख से अधिक हितधारक जिनमें मछुआरे, सूक्ष्म उद्यम, मत्स्य उत्पादक संगठन और निजी कंपनियां शामिल हैं—राष्ट्रीय मत्स्य पालन डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) से जुड़ चुके हैं। इसके अलावा, सरकार ने देशभर में 34 मत्स्य पालन समूहों को अधिसूचित किया है, जिनमें सिक्किम और मेघालय में विशेष जैविक मत्स्य समूह भी शामिल हैं। इनका मकसद पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ मत्स्य प्रथाओं को बढ़ावा देना है।
भारत इस समय दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान देता है। यह क्षेत्र न सिर्फ भोजन का बड़ा स्रोत है, बल्कि तटीय और ग्रामीण इलाकों के लाखों परिवारों की आजीविका भी इससे जुड़ी है।
केंद्रीय बजट 2025-26 में मत्स्य पालन क्षेत्र को अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक बजटीय समर्थन—2,703.67 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत नीतियों, आधुनिक तकनीक और समावेशी पहलों के चलते यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में और बड़ी छलांग लगाने को तैयार है।
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