भारत ने ग्रेफाइट खनन को बनाया और लाभदायक

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भारत ने ग्रेफाइट खनन को बनाया और लाभदायक

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केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाने और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से सीज़ियम, ग्रेफाइट, रूबिडियम और ज़िरकोनियम पर रॉयल्टी दरों को मंज़ूरी दी है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस निर्णय से न केवल घरेलू खनन उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग को भी बड़ा बल मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, “ग्रेफाइट की रॉयल्टी अब एड वैलोरेम होगी, जिससे इस खनिज के उत्पादन और खनन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।”

सरकारी सूत्रों के अनुसार, “कैबिनेट का निर्णय सीज़ियम, रूबिडियम और ज़िरकोनियम वाले खनिज ब्लॉकों की नीलामी को प्रोत्साहित करेगा, जिससे इन खनिजों के साथ पाए जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण तत्व जैसे लिथियम, टंग्स्टन, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) और नायोबियम को भी खोला जा सकेगा।”

वर्तमान में भारत अपनी ग्रेफाइट की लगभग 60% मांग आयात के ज़रिए पूरी करता है। फिलहाल देश में नौ ग्रेफाइट खदानें सक्रिय हैं, जबकि 27 ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है। इसके अलावा, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (GSI) और मिनरल एक्सप्लोरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (MECL) ने 20 ग्रेफाइट ब्लॉकों को नीलामी के लिए सौंपा है और 26 अन्य क्षेत्रों में खोज जारी है।

ग्रेफाइट इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों में एक अहम भूमिका निभाता है — यह एनोड सामग्री के रूप में उच्च विद्युत चालकता और चार्ज क्षमता प्रदान करता है। उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट (जिसमें 80% से अधिक कार्बन होता है) पर औसत विक्रय मूल्य के 2% की दर से रॉयल्टी लगेगी, जबकि निम्न ग्रेड ग्रेफाइट पर यह दर 4% होगी।

कैबिनेट के बयान में कहा गया कि, “ग्रेफाइट की रॉयल्टी दर 1 सितंबर 2014 से प्रति टन के आधार पर तय थी। यह एकमात्र ऐसा खनिज था जिसकी रॉयल्टी दर टन के हिसाब से तय की गई थी, न कि मूल्य आधारित।”

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर ग्रेफाइट खनन से बैटरी निर्माण की लागत में कमी आएगी और विदेशी निर्भरता घटेगी।

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