अमेरिका के साथ हाल ही में घोषित टैरिफ समझौते को लेकर विपक्ष की ओर से राजनीतिक विवाद तेज किया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियो के कृषि क्षेत्र में अमेरिका को पहुंच मिलने के दावों के बाद दोनों तरफ से बयानबाजी जारी है। इसी के बीच केंद्र सरकार के सूत्रों ने किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट की है। संसद परिसर के बाहर विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने कहा है कि इस व्यापार समझौते में किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है और कृषि तथा डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की मौजूदा सुरक्षा पूरी तरह बरकरार रहेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह आरोप तथ्यात्मक आधार से परे हैं और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। सरकार का दावा है कि अमेरिका के साथ हुआ यह टैरिफ समझौता भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगा, जबकि घरेलू कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा। सूत्रों ने दोहराया कि कृषि और डेयरी क्षेत्र को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है और इन पर पहले से लागू सुरक्षा उपायों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कच्चे तेल की खरीद को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। सूत्रों ने बताया कि भारत पहले की तरह उन्हीं देशों से कच्चा तेल खरीदेगा, जहां से खरीद पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है। उदाहरण देते हुए कहा गया कि जब वेनेज़ुएला पर प्रतिबंध थे, तब भारत ने वहां से तेल आयात नहीं किया था। अब पाबंदियां हटने के बाद, बाजार दरों के आधार पर वहां से तेल खरीदने का विकल्प खुला है। सरकार का कहना है कि ऊर्जा खरीद में भारतीय उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि रहेंगे और निर्णय बाजार भाव के अनुसार लिए जाएंगे।
सरकारी सूत्रों ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को लेकर 500 अरब डॉलर के अनुमान पर भी सफाई दी है। उनके मुताबिक, यह आंकड़ा इसलिए सामने आया है क्योंकि टैरिफ डील लागू होने से व्यापार और निवेश दोनों में तेजी आने की संभावना है। आमतौर पर अमेरिका से भारत का आयात 40–50 अरब डॉलर के बीच रहता है और लगभग उतना ही निवेश अमेरिका से भारत में आता है। इसके अलावा, विमानन, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और अन्य बड़े क्षेत्रों में संभावित सौदे मिलकर अगले कुछ वर्षों में कुल व्यापार और निवेश को 500 अरब डॉलर के स्तर तक ले जा सकते हैं।
वहीं, विपक्षी दलों ने संसद के बाहर प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया है कि इस टैरिफ डील में किसानों के हितों से समझौता किया गया है और इससे कृषि, डेयरी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि वह संसद में समझौते की सभी शर्तें सार्वजनिक करे और यह स्पष्ट करे कि कृषि क्षेत्र पर इसका क्या असर होगा।
सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कृषि और डेयरी सेक्टर को किसी भी तरह का खतरा नहीं है। सरकार का कहना है कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी साबित होगा और किसानों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी।
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