पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर हुआ 703.3 अरब डॉलर

पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर हुआ 703.3 अरब डॉलर

India's foreign exchange reserves rise to $703.3 billion amid West Asia tensions

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार(24 अप्रैल) को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) में 17 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 2.3 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय बैंक आरबीआई ने बताया कि देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 703.30 अरब डॉलर हो गया है।

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब इससे पहले भंडार पर लगातार दबाव बना हुआ था, जिसका कारण वैश्विक परिस्थितियां और करेंसी बाजार में हस्तक्षेप था।

इससे पहले, 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 728.494 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।

हालांकि, इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से यह रुझान उलट गया और भंडार में गिरावट देखने को मिली।

देश के गोल्ड रिजर्व (सोने का भंडार) में भी बढ़ोतरी जारी रही और यह 100 अरब डॉलर से अधिक की बढ़त के साथ 122.13 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया, जिसमें 79 मिलियन डॉलर की महत्वपूर्ण वृद्धि हुई।

इस दौरान, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) थोड़ा बढ़कर 18.84 अरब डॉलर हो गए। वहीं, आईएमएफ के पास भारत की रिजर्व पोजीशन 14 मिलियन डॉलर बढ़कर 48.70 अरब डॉलर हो गई।

वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेश के बाहर जाने (कैपिटल आउटफ्लो) से रुपए पर दबाव बना, जिसके चलते आरबीआई को डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा ताकि मुद्रा को स्थिर रखा जा सके।

इस हस्तक्षेप और पश्चिम एशिया युद्ध के बाद की स्थिति के कारण पिछले कुछ हफ्तों में भंडार में लगातार कमी आई थी।

हालांकि, हाल की बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि दबाव कुछ कम हो रहा है, लेकिन भंडार अभी भी फरवरी के उच्च स्तर से नीचे है।

विदेशी मुद्रा भंडार में यह बदलाव दिखाता है कि भारत वैश्विक झटकों को संभालते हुए मुद्रा स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

इससे पहले, 10 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 3.825 अरब डॉलर की वृद्धि हुई।

वहीं, 3 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में यह 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर हो गया था, जिससे लगातार सुधार का संकेत मिलता है।

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह केंद्रीय बैंक को मुद्रा में उतार-चढ़ाव संभालने और विदेशी व्यापार को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है।

मजबूत भंडार आरबीआई को जरूरत पड़ने पर रुपए को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की अनुमति देती है, साथ ही यह देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा के निरंतर प्रवाह को भी दर्शाती है।

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