LAT एयरोस्पेस के पहले ट्रायल में विमान प्रोटोटाइप ने साबित की अल्ट्रा-शॉर्ट टेकऑफ क्षमता

पहला टेस्ट विमान ट्रायल के दौरान हुआ क्रैश

LAT एयरोस्पेस के पहले ट्रायल में विमान प्रोटोटाइप ने साबित की अल्ट्रा-शॉर्ट टेकऑफ क्षमता

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ज़ोमेटो के सह-संस्थापक दीपिंदर गोयल की एविएशन स्टार्टअप LAT एयरोस्पेस ने छोटे रनवे से उड़ान भरने वाली तकनीक निर्माण में अहम् उपलब्धि दर्ज की है। कंपनी ने अपने पहले विमान प्रोटोटाइप Lat One v0.1 के साथ अल्ट्रा-शॉर्ट टेकऑफ एंड लैंडिंग (uSTOL) क्षमता का सफल परीक्षण किया। हालांकि, टेकऑफ के कुछ ही देर बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। कंपनी का कहना है कि यह क्रैश पहले से पहचानी गई संरचनात्मक कमजोरियों के कारण हुआ और परीक्षण का मूल उद्देश्य पूरा हो गया।

दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टेस्ट फ्लाइट का वीडियो साझा किया और बताया कि परीक्षण का मुख्य लक्ष्य विमान की बेहद कम दूरी में उड़ान भरने की क्षमता को साबित करना था। उनके अनुसार, कंप्यूटर सिमुलेशन में पहले ही कुछ संरचनात्मक समस्याएं सामने आ चुकी थीं, इसलिए क्रैश पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं था। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह एक सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा था और इससे महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां मिली हैं।

गोयल ने यह भी रेखांकित किया कि किसी विमान को उड़ाना चुनौती का केवल एक हिस्सा है, जबकि सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करना कहीं अधिक जटिल और महत्वपूर्ण कार्य है। LAT एयरोस्पेस के अनुसार, टीम अब अगले संस्करण Lat One v0.2 पर काम कर रही है, जिसे पूर्ण उड़ान मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए डिजाइन किया जाएगा।

LAT एयरोस्पेस की स्थापना जनवरी 2025 में दीपिंदर गोयल और ज़ोमैटो की पूर्व कार्यकारी सुरोभी दास ने की थी। यह स्टार्टअप एक नए प्रकार के शॉर्ट टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (STOL) विमान विकसित कर रहा है, जिन्हें बड़े हवाई अड्डों के बजाय छोटे एयर-स्टॉप्स से संचालित किया जा सकेगा। कंपनी का मानना है कि इससे कम दूरी की हवाई यात्रा और कार्गो परिवहन अधिक तेज, सुलभ और लचीला हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़े एयरपोर्ट उपलब्ध नहीं हैं।

Lat One प्रोटोटाइप एक पूरी तरह इलेक्ट्रिक विमान है, जिसे कंपनी ने अपने इन-हाउस फ्लाइट लैब में डिजाइन और विकसित किया है। गोयल के अनुसार, यह विमान करीब 60 मिनट तक उड़ान भरने में सक्षम है और सैद्धांतिक रूप से मुंबई–पुणे जैसे छोटे रूट पर बिना पायलट के उड़ान भर सकता है। यह क्षमता स्वायत्त (ऑटोनॉमस) उड़ान और शॉर्ट-डिस्टेंस डिलीवरी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आगे की योजना के तहत LAT एयरोस्पेस हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक इंजन विकसित करने पर काम कर रही है, ताकि उड़ान की रेंज और पेलोड क्षमता बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही, कंपनी गैस टर्बाइन इंजन डिजाइन करने के लिए अपनी इन-हाउस टीम भी तैयार कर रही है, जो किसी युवा स्टार्टअप के लिए असामान्य लेकिन महत्वाकांक्षी कदम माना जा रहा है।

हालांकि पहला टेस्ट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन कंपनी का रुख सकारात्मक बना हुआ है। LAT एयरोस्पेस का कहना है कि इस परीक्षण से टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और मिली सीख के आधार पर अगला प्रोटोटाइप पहले से अधिक मजबूत और सक्षम होगा। स्टार्टअप को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में वह अपनी uSTOL तकनीक को और परिष्कृत कर भारत के क्षेत्रीय हवाई परिवहन के भविष्य में एक नई दिशा दे सकेगा।

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