भारत सरकार घरेलू चिप निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लगभग 1 लाख करोड़ रुपये (करीब ₹99,943.75 करोड़) का बड़ा सेमीकंडक्टर फंड लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह पहल भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की रणनीति का हिस्सा है। जानकारी के अनुसार इस फंड की घोषणा अगले दो से तीन महीनों के भीतर की जा सकती है, हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम चर्चा जारी है और विवरण में बदलाव संभव है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षाओं को गति देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। फिलहाल देश में इस क्षेत्र की परियोजनाएं शुरुआती चरण में हैं और कुछ ही बड़े प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं। प्रस्तावित फंड का उद्देश्य चिप डिजाइन, विनिर्माण उपकरणों की खरीद और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन के विकास के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराना है।
वैश्विक स्तर पर भी कई देश सेमीकंडक्टर उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए बड़े निवेश कर रहे हैं। अमेरिका ने 4.36 लाख करोड़ रुपये के चिप्स एंड साइंस एक्ट के माध्यम से स्थानीय उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देने की योजना शुरू की है। वहीं चीन भी राज्य समर्थित निवेश फंड के जरिए सेमीकंडक्टर उद्योग की प्रमुख कंपनियों में निवेश कर रहा है। इस तरह दुनिया में तकनीकी प्रभुत्व के लिए चिप निर्माण को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
नई दिल्ली की रणनीति का एक प्रमुख लक्ष्य दुनिया की अग्रणी चिप कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना है। सरकार भारत की विशाल इंजीनियरिंग और डिजाइन प्रतिभा के साथ-साथ आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहनों के जरिए कंपनियों को यहां उत्पादन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी प्रकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं की मदद से एप्पल अब अपने लगभग 25 प्रतिशत iPhone भारत में असेंबल कर रहा है।
यह नया सेमीकंडक्टर फंड पहले से चल रही स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स से जुड़ी सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय से काम करेगा, जिससे घरेलू विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा सके। इस प्रस्तावित फंड की निगरानी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय करेगा, हालांकि मंत्रालय की ओर से अभी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इससे पहले वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने ₹83,500 करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी, जिसके तहत चिप फैब्रिकेशन और संबंधित परियोजनाओं की लागत का 50 प्रतिशत तक सरकार वहन करने का प्रावधान किया गया था। इसी योजना के तहत अमेरिका की कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी इंक. ने गुजरात के साणंद जिले में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग प्लांट स्थापित करने की घोषणा की थी।
इसके अलावा टाटा समूह भी गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट और चिप पैकेजिंग यूनिट विकसित कर रहा है। वहीं फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप ने भी परीक्षण, असेंबली और पैकेजिंग यूनिट स्थापित करने की योजना घोषित की है।
हालांकि भारत की शुरुआती परियोजनाएं अपेक्षाकृत कम उन्नत चिप तकनीकों पर केंद्रित हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना है। केंद्रीय प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्ष 2032 तक भारत को ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे अग्रणी देशों के बराबर सेमीकंडक्टर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य बताया है।
भारत वर्तमान में सेमीकंडक्टर की अपनी जरूरतों का 95 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। ऐसे में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का यह नया निवेश ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और आयात निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं का तेज़ी से क्रियान्वयन हुआ, विदेशी निवेश आकर्षित हुआ और कुशल मानव संसाधन तैयार किया गया, तो भारत आने वाले दशक की शुरुआत तक 1 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। हालांकि भारी पूंजी निवेश, बिजली और पानी की बड़ी मांग तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के सब्सिडी आधारित प्रतिस्पर्धियों जैसी चुनौतियां अभी भी सामने बनी हुई हैं।
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