भारतीय रिजर्व बैंक की अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में एक अहम फैसला सामने आया है। ईरान बनाम इजरायल और अमेरिका के बीच युद्धविराम के ऐलान के बावजूद RBI ने सतर्क रुख अपनाया है। RBI की मौद्रिक नीति समिती (MPC) ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। इसका सीधा असर यह है कि कर्जदारों के लिए EMI में कोई बदलाव नहीं होगा। गृह ऋण, वाहन ऋण या व्यक्तिगत ऋण की किस्तें फिलहाल मौजूदा कीमतों पर ही बनी रहेंगी।
इस फैसले के पीछे मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितता है। पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे बाजार में कुछ हद तक स्थिरता आई है। इससे महंगाई पर दबाव थोड़ा कम हुआ है, लेकिन RBI अभी भी सतर्क बना हुआ है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में समिति ने स्पष्ट किया कि फिलहाल महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, सप्लाई चेन की समस्याएं और वैश्विक राजनीतिक तनाव अभी भी महंगाई बढ़ाने का जोखिम पैदा कर सकते हैं। पिछले एक साल में RBI ने कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर चूका है, इसलिए अभी तुरंत कोई नया बदलाव करने के बजाय स्थिति पर नजर रखने को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस बीच, शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला है। युद्धविराम की घोषणा के बाद BSE सेंसेक्स 2700 अंक ऊपर चढ़ा और निफ्टी 50 में 824 अंकों की तेज बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार अस्थायी हो सकता है।
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