भारतीय पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) बाजार से जुड़े संस्थानों की साइबर सुरक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक नई तकनीकी पहल पर काम कर रहा है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शुक्रवार (2 जनवरी)को घोषणा कर बताया की नियामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित टूल विकसित कर रहा है, जिसका उद्देश्य विनियमित संस्थाओं की साइबर ऑडिट रिपोर्ट का विश्लेषण करना, नियंत्रण में मौजूद खामियों की पहचान करना और जोखिम के स्तर के आधार पर संस्थाओं का वर्गीकरण करना होगा।
मुंबई में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में आयोजित सेंसेक्स की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर बोलते हुए पांडेय ने कहा, “AI-संचालित यह निरीक्षण टूल फिलहाल विकास के चरण में है, जो विनियमित संस्थाओं की जोखिम-आधारित निगरानी को और मजबूत करेगा।” उन्होंने बताया कि यह टूल साइबर ऑडिट रिपोर्ट्स का गहन विश्लेषण करेगा, संभावित नियंत्रण अंतराल (कंट्रोल गैप्स) को चिह्नित करेगा और संस्थाओं को उनके साइबर जोखिम जोखिम-एक्सपोजर के आधार पर वर्गीकृत करेगा।
सेबी प्रमुख ने यह भी बताया कि नियामक बाजार अवसंरचना संस्थानों (मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस – MIIs) के लिए एक व्यापक प्रौद्योगिकी रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से वर्किंग ग्रुप के गठन की प्रक्रिया में है। यह रोडमैप सिक्युरिटी मार्किट के इकोसिस्टम के लिए अल्पकालिक (पांच वर्ष) और दीर्घकालिक (दस वर्ष) रणनीतिक तकनीकी दृष्टिकोण प्रदान करेगा।
तुहिन कांत पांडेय ने स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य MII से आग्रह किया कि वे प्रौद्योगिकी, जोखिम प्रबंधन और साइबर रेज़िलिएंस में लगातार निवेश करते रहें। उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि नवाचार बाजार की अखंडता को मजबूत करे, न कि उसे कमजोर करे।”
सेबी प्रमुख ने कहा कि निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और निवेशक आधार के विविधीकरण के बीच नियामक ढांचे को मजबूत करना सेबी की प्राथमिकता रही है। उन्होंने कहा, “स्थायी बाजार क्षणिक ऊंचाइयों या आशावाद के चक्रों पर नहीं टिके होते। वे उन संस्थानों पर टिके होते हैं जो भरोसा पैदा करते हैं, उस नियमन पर जो बाजार के साथ विकसित होता है और उन प्रणालियों पर जो लगातार खुद को अनुकूलित और उन्नत करती रहती हैं।”
अपने संबोधन में पांडेय ने 1986 में शुरू किए गए सेंसेक्स का भी उल्लेख किया और कहा कि यह सूचकांक केवल एक इंडेक्स नहीं है, बल्कि भारत के पूंजी बाजार की अब तक की यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “भारतीय प्रतिभूति बाजार का इतिहास बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (अब बीएसई) के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है, जो एशिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है।”
सेबी की यह नई एआई पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन ट्रेडिंग और तकनीक-आधारित निवेश प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर जोखिम भी तेजी से बढ़े हैं। नियामक की इस पहल को बाजार की सुरक्षा, पारदर्शिता और निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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