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Tuesday, October 27, 2026
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छत्तीसगढ़: सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, 14 माओवादी ढेर!

सुकमा और बीजापुर पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुठभेड़ में कई माओवादी मारे गए। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, सुकमा और बीजापुर में मरने वालों की संख्या 14 से ज्यादा है।

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इस साल के सबसे बड़े ‘नक्सल विरोधी’ ऑपरेशनों में से एक में सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर इलाके के सुकमा और बीजापुर जिलों में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 से ज्यादा माओवादियों को मार गिराया।

सुकमा जिले के किस्ताराम इलाके के घने जंगलों में मुख्य मुठभेड़ हुई, जहां सुरक्षाकर्मियों की जॉइंट टीमें इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चला रही थीं। माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की, जिसके बाद दोनों तरफ से कई घंटों तक जबरदस्त गोलीबारी हुई।

सुकमा और बीजापुर पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुठभेड़ में कई माओवादी मारे गए। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, सुकमा और बीजापुर में मरने वालों की संख्या 14 से ज्यादा है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मारे गए ज्यादातर माओवादी दरभा वैली कमेटी (डीवीसीएम) कैडर के थे, जो एक प्रमुख माओवादी संगठन है। खास बात यह है कि कोंटा के एडिशनल एसपी आकाश गिरपुंजे की हत्या में कथित तौर पर शामिल नक्सली कमांडर भी मारे गए लोगों में शामिल था, जिससे संगठन को बड़ा झटका लगा है।

मौके से बरामद हथियारों में एक एके-47 और एक इंसास राइफल के साथ-साथ अन्य गोला-बारूद और विस्फोटक शामिल हैं। ऑपरेशन अभी भी जारी है; टीमें इलाके की तलाशी ले रही हैं।

मृतकों की सटीक संख्या और पहचान तब होगी जब सुरक्षा बल घने जंगल वाले इलाकों से वापस लौटेंगे। नक्सल विरोधी ऑपरेशन की चल रही और बहुत संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए अधिकारियों ने मुख्य जानकारी, जिसमें गोलीबारी की सही जगह या तैनात सुरक्षा बलों की संख्या शामिल है, का खुलासा न करने का फैसला किया है।

पत्रकारों से बात करते हुए, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि ऑपरेशन एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है और अभी भी जारी है। जमीन पर हमारे जवानों की सुरक्षा के लिए, हम इस समय ऑपरेशन की खास जानकारी साझा नहीं कर सकते हैं।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मारे गए माओवादियों की पहचान, जब्त हथियारों की जानकारी और नतीजे के बारे में पूरी जानकारी तभी सार्वजनिक की जाएगी, जब मिशन पूरी तरह से खत्म हो जाएगा और इलाके को सुरक्षित घोषित कर दिया जाएगा।

लगातार काउंटर-ऑपरेशंस, आत्मसमर्पण और विकास पहलों के कारण उग्रवाद में काफी कमी आई है। मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और झारखंड में प्रभावित जिले घटकर 20 से भी कम हो गए हैं।

सरकार का लक्ष्य सुरक्षा कैंप, इंफ्रास्ट्रक्चर और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए 31 मार्च तक वामपंथी उग्रवाद को खत्म करना है।

हाल के सालों में कई माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है या उन्हें मार गिराया गया है, जिससे उनका ढांचा कमजोर हुआ है। हालांकि, आदिवासी विस्थापन और असमानता जैसे मूल कारण अभी भी मौजूद हैं, जो लंबे समय के समाधान पर सवाल उठाते हैं।

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