भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार (30 जनवरी) को तेज़ मुनाफावसूली देखने को मिली। बजट से पहले बढ़ी अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है, जिसके चलते शुरुआती कारोबार में ही दोनों प्रमुख सूचकांक तेज़ी से नीचे आ गए। सेंसेक्स करीब 625 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर अहम 25,300 के स्तर से नीचे चला गया।
BSE सेंसेक्स करीब 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ इंट्राडे में 81,941 के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 भी लगभग 194 अंक या 0.75 प्रतिशत गिरकर 25,224 पर आ गया। बिकवाली के दबाव की तीव्रता इतनी थी की कारोबार के पहले 15 मिनट में ही निवेशकों की संपत्ति से करीब ₹4 लाख करोड़ साफ हो गए।
बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण आगामी केंद्रीय बजट को लेकर बनी अनिश्चितता मानी जा रही है। निवेशक आमतौर पर बजट जैसे बड़े नीतिगत घटनाक्रम से पहले जोखिम कम करना पसंद करते हैं, क्योंकि टैक्स, सरकारी खर्च और सुधारों से जुड़े ऐलान सीधे कॉरपोरेट मुनाफे और शेयर कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
हाल के दिनों में आई तेज़ तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा सुरक्षित करने का फैसला किया। बाजार सहभागियों का मानना है कि बजट से अर्थव्यवस्था की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं पर स्पष्ट संकेत मिलेंगे, लेकिन उससे पहले अल्पकालिक अस्थिरता बनी रह सकती है।
भारतीय रुपया भी बाजार पर दबाव बढ़ा रहा है। शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 91.92 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि इससे पहले यह 91.98 के अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका था। कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाता है। इसके अलावा, रुपये में गिरावट विदेशी पूंजी के बाहर जाने का संकेत भी मानी जाती है, जो आमतौर पर शेयर बाजारों पर नकारात्मक असर डालती है।
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें करीब पांच महीने के उच्च स्तर के पास पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतें आयात करता है, ऐसे में ऊंची तेल कीमतें चालू खाते के घाटे, महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं। एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे ऊर्जा-निर्भर सेक्टरों पर इसका सीधा असर पड़ता है।
वैश्विक बाजारों में भी जोखिम से बचने का माहौल जारी है। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स लाल निशान में रहे, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। अमेरिका में राजनीतिक अनिश्चितता, ब्याज दरों को लेकर चिंता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क किया है। क्रिप्टोकरेंसी और धातुओं जैसे अन्य जोखिम वाले एसेट्स में भी दबाव देखा गया, जिससे साफ है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित विकल्पों की ओर झुक रहे हैं।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी ऊंचे स्तरों पर मजबूत रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है और आगे बढ़ने के लिए किसी ठोस सकारात्मक ट्रिगर की जरूरत है। स्पष्ट संकेतों के अभाव में, खासकर बजट के आसपास, बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कुल मिलाकर, बजट से पहले घरेलू और वैश्विक कारकों के दबाव में भारतीय शेयर बाजारों में फिलहाल सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
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