भारत ने घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने की ठान ली है। इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारत की निजी टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को मंजूरी दे दी गई है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, 66.16 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस परियोजना में लगभग ₹91,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा और इससे करीब 21,000 रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
यह निर्णय जून 2025 में किए गए उन सुधारों के बाद आया है, जिनमें सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट सेक्टर के लिए SEZ की न्यूनतम भूमि आवश्यकता को 50 हेक्टेयर से घटाकर 10 हेक्टेयर कर दिया गया था। इस नीति बदलाव का उद्देश्य चिप निर्माण क्षेत्र में निवेश को तेजी के साथ आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया था।
TATA की परियोजना के अलावा, सरकार ने चार अन्य सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट SEZ को भी मंजूरी दी है। इनमें माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, केनेस सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड और सीजी सेमी प्राइवेट लिमिटेड। जैसी कंपनियों के प्रस्ताव शामिल हैं। इन परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये का निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है। विशेष रूप से माइक्रोन की भारतीय इकाई ने ₹13,000 करोड़ निवेश का प्रस्ताव रखा है, जिससे 20,000 से अधिक रोजगार सृजित हो सकते हैं।
छोटे स्तर की परियोजनाएं, जैसे कि केनेस और सीजी सेमी की योजनाएं, असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (OSAT) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। सीजी सेमी ने ₹2,150 करोड़ और केनेस ने ₹681 करोड़ निवेश का प्रस्ताव रखा है। ये क्षेत्र सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के अहम हिस्से हैं और देश में संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा, हुबली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड को भी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण और सेवाओं के लिए SEZ की मंजूरी मिली है, जिसमें ₹100 करोड़ का निवेश और 4,360 रोजगार सृजन की संभावना है।
इन सभी परियोजनाओं का समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से विकास के चलते सेमीकंडक्टर की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत का अपना चिप निर्माण का ढांचा विकसित करने का प्रयास आर्थिक के साथ रणनीतिक दृष्टी से भी अहम है।
