भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पृथ्वी-II मिसाइल प्रणाली के लिए तीन वर्ष का लाइफसाइकल सपोर्ट अनुबंध हासिल किया है। यह समझौता मिसाइल की निरंतर परिचालन क्षमता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है, जिससे यह भारत की सामरिक ताकत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहे।
इस अनुबंध के तहत पृथ्वी-II मिसाइल प्रणाली के रखरखाव, नियमित तकनीकी जांच और आवश्यक अपग्रेड शामिल होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह प्लेटफॉर्म अपने पूरे सेवा काल के दौरान विश्वसनीय और उपलब्ध बना रहे। इससे मिसाइल प्रणाली की कार्यक्षमता और सुरक्षा में निरंतरता बनी रहेगी।
इसी के साथ DRDO अगली पीढ़ी की मिसाइल तकनीकों के विकास पर भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य भारत की प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करना है, ताकि भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अत्याधुनिक तकनीकों से लैस प्रणालियां विकसित की जा सकें।
संगठन विशेष रूप से सटीकता, विश्वसनीयता और समग्र प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस दिशा में मार्गदर्शन तंत्र, प्रणोदन प्रणाली और वारहेड डिलीवरी की सटीकता में सुधार किए जा रहे हैं। ये अपग्रेड न केवल मौजूदा पृथ्वी-II मिसाइल की क्षमता को बढ़ाएंगे, बल्कि भविष्य की उन्नत प्रणालियों के विकास के लिए आधार भी तैयार करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा प्रणालियों के रखरखाव और नई तकनीकों में निवेश की यह दोहरी रणनीति भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगी। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह कदम देश को रणनीतिक बढ़त दिलाने में सहायक हो सकता है।
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