पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा, “योग का नियमित अभ्यास तन को स्वस्थ और मन को शांत रखता है। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से जीवन संतुलित और ऊर्जावान बनता है।”
इस ‘सुभाषितम’ संदेश के साथ पीएम मोदी ने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया। यह श्लोक इस प्रकार है: “योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन। योऽपाकरोत् तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥”
इस श्लोक का अर्थ यह है कि मन की चित्त वृत्तियों को योग से, वाणी को व्याकरण से और शरीर की अशुद्धियों को आयुर्वेद द्वारा शुद्ध करने वाले मुनियों में सर्वश्रेष्ठ महर्षि पतञ्जलि को मैं दोनों हाथ जोड़कर नमन करता हूं।
इससे पहले, ‘सुभाषितम’ संदेश में बुधवार को पीएम मोदी ने एकजुटता को लेकर एक प्रेरणादायी ‘सुभाषितम’ संदेश शेयर किया था। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि एकजुटता और आपसी सहयोग से राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि लिखा जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वहीं, इस पोस्ट के साथ शेयर किया गया श्लोक इस प्रकार था: “धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च। धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥”
इस श्लोक का अर्थ यह है कि जिस प्रकार लकड़ियां अलग-अलग होने पर अपनी पूर्ण ऊर्जा प्रकट नहीं कर पातीं, किन्तु एकत्र होने पर प्रज्वलित होकर प्रकाश और ऊष्मा प्रदान करती हैं, उसी प्रकार किसी राज्य की उन्नति, समृद्धि और शक्ति उसके नागरिकों की एकता, पारस्परिक सहयोग तथा सामूहिक संकल्प पर आधारित होती है।
दिन में छाया अंधेरा, काले बादलों और तेज आंधी-तूफान ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें!



