AI के खौफ से IT क्षेत्र में 8 दिन में ₹6 लाख करोड़ खाक

गहरे दबाव में शेयर बाजार

AI के खौफ से IT क्षेत्र में 8 दिन में ₹6 लाख करोड़ खाक

The fear of AI has wiped out ₹6 lakh crore in the IT sector in 8 days.

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार (13 फरवरी)को लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सुबह करीब 11:45 बजे सेंसेक्स 813 अंकों की भारी गिरावट के साथ 82,861 पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 252 अंक या करीब 0.98 प्रतिशत टूटकर 25,550 के आसपास आ गया। बाजार की कमजोरी का सबसे बड़ा कारक आईटी सेक्टर रहा है , जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से निर्माण हुए खौफ ने 8 दिन में निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ रूपए खाक किए है।

करीब 250 अरब डॉलर वैल्यू वाला भारतीय IT सेक्टर इस समय बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 8 कारोबारी दिनों में आईटी कंपनियों के मार्केट कैप से करीब ₹6 लाख करोड़ की पूंजी साफ हो चुकी है। इस दौरान इंफोसिस लगभग 21 प्रतिशत, TCS करीब 19 प्रतिशत और HCL टेक लगभग 17 प्रतिशत गिर चुके हैं। TCS का मार्केट कैप गिरकर 10 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया है, जो अक्टूबर 2020 के स्तर से भी कम है।

IT के साथ-साथ अन्य सेक्टर्स में भी भारी बिकवाली देखी गई। निफ्टी मेटल और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। मेटल सेक्टर में हिंडाल्को और नेशनल एल्युमिनियम के शेयर करीब 5 प्रतिशत टूटे। वहीं रियल्टी सेक्टर में DLF और गोदरेज प्रॉपर्टीज लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे।

दिलचस्प बात यह रही कि मजबूत नतीजों और 2,300 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर मिलने के बावजूद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के शेयरों में बड़ा उछाल नहीं दिखा और सुबह 11:50 बजे तक इनमें केवल 2 प्रतिशत की तेजी रही।

बाजार में घबराहट की बड़ी वजह अमेरिका में टेक स्टॉक्स में बिकवाली और नई तकनीकों को लेकर बढ़ता डर है। खास तौर पर अमेरिकी AI स्टार्टअप एंथ्रोपिक के नए टूल्स और उसके Claude 4.6 मॉडल ने पारंपरिक आईटी सर्विस बिजनेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निवेशकों को डर है कि AI के चलते हेडकाउंट-आधारित बिलिंग मॉडल कमजोर होगा और IT  कंपनियों में नौकरियों व काम के घंटों में कटौती होगी।

अमेरिकी शेयर बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला। डाउ जोंस 669 अंक (1.34%) गिरकर 49,451 पर बंद हुआ, नैस्डैक कंपोजिट 2.03 प्रतिशत टूटकर 22,597 पर बंद हुआ, S&P 500 108 अंक (1.57%) फिसलकर 6,832 पर आ गया। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों की बड़ी कमाई अमेरिका से आती है, इसलिए वहां की कमजोरी का सीधा असर घरेलू आईटी शेयरों पर पड़ा है।

घरेलू बाजार में तस्वीर बेहद कमजोर है। करीब 2,500 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं, जबकि बढ़त वाले शेयरों की संख्या 1,000 से भी कम है। 118 शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं और 62 शेयरों में लोअर सर्किट लगा है। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों (CPI डेटा) पर टिकी है। इस अनिश्चितता के बीच अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 4.10 प्रतिशत पर आ गई है।

इस तेज गिरावट के बीच जेपी मॉर्गन ने इसे खरीदारी का अवसर बताया है। बैंक का मानना है कि आईटी कंपनियां  टेक्नोलॉजी जगत की प्लम्बर हैं और AI के बावजूद उनकी जरूरत बनी रहेगी। हालांकि, निवेशक अभी भी पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल के भविष्य को लेकर सशंकित हैं। आने वाले हफ्तों में यह साफ होगा कि आईटी शेयरों के लिए सबसे बुरा दौर खत्म हुआ या गिरावट अभी और बाकी है।

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