मुंबई के टिलक नगर स्थित पंचशील नगर में झोपड़पट्टी पुनर्विकास योजना (SRA) से जुड़ा कथित वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसकी राशि लगभग ₹80 करोड़ आंकी गई है। इस मामले में मुंबई पुलिस की इकनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने आशापुरा ग्रुप के निदेशकों और साझेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और सरकारी निधियों के दुरुपयोग के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों में चेतन भंसाली, प्रवीण चमाड़िया, माया हिकमत उदन, मीना चेतन भंसाली, धनजी गणेशा पटेल, लक्ष्मीबेन पटेल और बेचर पटेल के नाम शामिल हैं। मामले की जांच EOW की यूनिट-14 कर रही है, जिसकी निगरानी सहायक पुलिस निरीक्षक योगेश भद्रे कर रहे हैं।
इस कथित घोटाले का खुलासा 31 वर्षीय चैतन्य जतीन मेहता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद हुआ। चैतन्य घाटकोपर स्थित अरिहंत रियल्टर्स के पार्टनर हैं और उनके माता-पिता जतीन और पल्लवी मेहता भी रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े हैं। 24 अगस्त 2008 को अरिहंत रियल्टर्स ने टिळक नगर के पंचशील नगर झोपड़पट्टी का पुनर्विकास शुरू किया था। इस परियोजना में छह हाउसिंग सोसायटीज और 800 से अधिक झोपड़पट्टी निवासी शामिल थे, जिनमें से 700 से अधिक ने परियोजना के लिए अरिहंत को प्राथमिकता दी।
12 जुलाई 2011 को आशापुरा ग्रुप के चेतन भद्रा उर्फ चेतन भंसाली और प्रवीण चमाड़िया को अरिहंत- आशापुरा प्रोजेक्ट नामक संयुक्त उपक्रम में 65% हिस्सेदारी दी गई, जिसे 29 जनवरी 2015 को औपचारिक रूप से दर्ज किया गया।
2016 तक परियोजना को SRA से Occupation Certificate (OC) और Commencement Certificate (CC) प्राप्त हो चुका था। समझौते के तहत आशापुरा को फंडिंग और परियोजना प्रबंधन का जिम्मा सौंपा गया था, जबकि अरिहंत झोपड़पट्टी निवासियों से जमीन खाली कराने की प्रक्रिया में लगा था। लेकिन कथित तौर पर फॉरेंसिक ऑडिट में पाया गया कि आशापुरा ने न सिर्फ फंडिंग में कोताही बरती, बल्कि फर्जी बिलिंग, बोगस लेनदार और पैसे की हेराफेरी के माध्यम से बड़े पैमाने पर घोटाला किया।
PNB हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (दिल्ली) से परियोजना के पहले और दूसरे चरण के लिए कुल ₹180 करोड़ का लोन स्वीकृत हुआ, जिसमें से ₹30 करोड़ पहले चरण और ₹21 करोड़ दूसरे चरण के लिए जारी हुए। लेकिन जांच में सामने आया कि इन राशियों का इस्तेमाल निर्माण के बजाय, एक्सजेंडर फाइनेंस नामक कंपनी के कर्ज चुकाने और चेतन भंसाली के भाई हिमत भद्रा के निजी लाभ के लिए किया गया।
इसके अलावा, कथित तौर पर फ्लैट खरीदारों से वसूली गई रकम को निर्धारित एस्क्रो खातों में जमा करने के बजाय सामान्य चालू खाते में जमा किया गया। आशापुरा से जुड़ा हुए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) ने ₹18 करोड़ के फर्जी बिल जमा किए, जिससे अरिहंत रियल्टर्स को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। फॉरेंसिक ऑडिट के अनुसार, आशापुरा ने लगभग 200 फर्जी लेनदार बनाए और ₹140 करोड़ की देनदारी दर्शाई, ताकि पैसे की हेराफेरी को वैध रूप दिया जा सके।
2021 में, आशापुरा ग्रुप ने लोन डिफॉल्ट किया और परियोजना को अधूरा छोड़ दिया। 17 दिसंबर 2021 को, आशापुरा ने सभी अधिकार छोड़ने और ₹21 करोड़ के मुआवजे के बदले समझौता किया, लेकिन न तो पूरी जानकारी दी और न ही बैंक खातों के साइनिंग अथॉरिटी अपडेट की, जिससे परियोजना और अधिक फंस गई। FIR दर्ज होने के बाद अब इस मामले की गहन जांच की जा रही है। मुंबई की रियल एस्टेट इंडस्ट्री में यह एक गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला माना जा रहा है, जिससे न सिर्फ निवेशकों को नुकसान हुआ, बल्कि झोपड़पट्टी पुनर्विकास की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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