विनट्रैक विवाद से उठा बड़ा तूफान: चेन्नई कस्टम्स पर देशभर से भ्रष्टाचार के आरोप!

विनट्रैक विवाद से उठा बड़ा तूफान: चेन्नई कस्टम्स पर देशभर से भ्रष्टाचार के आरोप!

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चेन्नई कस्टम्स और विनट्रैक इंक के बीच रिश्वत विवाद अब बड़े खुलासों में बदल गया है। वित्त मंत्रालय ने इस मामले में औपचारिक जांच की पुष्टि की है, जिसके बाद देशभर के आयातक, कस्टम ब्रोकर और कारोबारी अपने-अपने अनुभव साझा करने लगे हैं। आरोपों में रिश्वतखोरी, उत्पीड़न और माल छुड़ाने में जानबूझकर देरी जैसी शिकायतें शामिल हैं।

सरकार ने दी जांच की पुष्टि

वित्त मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा, “सरकार ने विनट्रैक इंक (चेन्नई) द्वारा उठाए गए मुद्दे को संज्ञान में लिया है। राजस्व विभाग (DoR) को निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्य-आधारित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी को विस्तृत जांच के लिए नियुक्त किया गया है, जो संबंधित पक्षों की सुनवाई करेंगे और सभी दस्तावेजी सबूतों का परीक्षण करेंगे। सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है और कानून के अनुसार शीघ्र कार्रवाई करेगी।”

आयातकों और कारोबारियों के आरोप

इस मामले के सामने आने के बाद कई कारोबारी खुलकर सामने आए। चेन्नई के उद्यमी उदय संबथ ने बताया कि उनके दोस्त को कस्टम्स से माल छुड़ाने के लिए ₹47,000 रिश्वत देनी पड़ी।

आयातक युसुफ उंजहावाला ने लिखा,“मांगें अक्सर शिपमेंट वैल्यू के 10–50% तक होती हैं। वरना माल को जांच में डाल दिया जाता है, जिससे डेमरेज और कारोबार का नुकसान होता है। हमारे पास भुगतान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता।”

राजकोट के व्यापारी विनीत वेकारिया ने दावा किया कि “MOOWR स्कीम के लिए विभाग ₹5–7 लाख की मांग करता है, वरना अनंत देरी झेलनी पड़ती है। पूरा विभाग भ्रष्टाचार में डूबा है।”

कस्टम क्लियरेंस के अनुभवी सलमान ने कहा, “मैं विनट्रैक इंक की हर बात से सहमत हूं। यह तो भ्रष्टाचार की हिमखंड का केवल ऊपरी हिस्सा है। पूरे देश में कस्टम्स जोन में संगठित भ्रष्टाचार चल रहा है। अफसरों की जेब गर्म किए बिना कोई आयातक या CHA जिंदा नहीं रह सकता।”

व्यक्तिगत शिपमेंट भी निशाने पर

राहुल सुब्रमण्यम ने बताया कि विदेश से लौटने के बाद अपने घरेलू सामान की क्लीयरेंस के दौरान चेन्नई कस्टम्स ने उनसे ₹80,000 की अवैध मांग की। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह राशि आधिकारिक रूप से चुकाई, लेकिन अफसर निराश हो गए कि उन्हें रिश्वत नहीं मिली।

इसी तरह, अरविंद ने बताया कि कस्टम्स एक्सपोर्ट्स स जुड़े मामलों में पहले से ही सीबीआई जांच चल रही है। आयातक आदित्य क्षीरसागर ने खुलासा किया कि उन्होंने BIS सर्टिफिकेट्स के लिए कई बार मोबाइल फोन रिश्वत में दिए। उन्होंने कहा कि “कई बार एक लॉन्च के समय दर्जनों फोन अफसरों को देने पड़ते हैं ताकि शिपमेंट बिना जांच के क्लियर हो जाए।”

उद्योग जगत का मानना है कि विनट्रैक विवाद ने वर्षों से दबे भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है। कई कारोबारी इसे सिस्टम में सुधार लाने का मौका मान रहे हैं। सरकार की जांच से यह साफ है कि मामला अब चेन्नई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर के पोर्ट्स पर कस्टम्स विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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