एक कंपनी के कर्मचारी से सीनियर ऑफिसर के नाम पर कॉल करके 1.5 करोड़ रुपये ठगने के मामले की जांच करते हुए, अहमदाबाद पुलिस ने एक बड़े इंटरनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क का पता लगाया है। जांच में पता चला है कि साइबर क्राइम के लिए करीब 4,500 SIM कार्ड इस्तेमाल किए गए थे, और पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क के तार चीन और पाकिस्तान तक पहुंचे हैं।
मामला जून में शुरू हुआ था। साइबर ठगों ने कंपनी के एक कर्मचारी से सीनियर ऑफिसर के नाम पर संपर्क किया और उससे 1.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। फ्रॉड की जानकारी मिलते ही अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस की तुरंत कार्रवाई से फ्रॉड के करीब 1.3 करोड़ रुपये बरामद हुए।
जांच के दौरान, पुलिस ने पश्चिम बंगाल से इमरान अली पियादा और इंजामुल मुजीबर मोल्लाह को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से आठ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए। जांच में पता चला कि इनमें से एक डिवाइस से एक साथ चार SIM कार्ड ऑपरेट किए जा सकते हैं। जांच के दौरान, आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने साइबर क्राइम के लिए 4,500 SIM कार्ड हासिल किए थे।
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि यह नेटवर्क OTP का गलत इस्तेमाल कर रहा था। आरोपियों पर ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग के लिए करीब 21,000 OTP देने का शक है। जांच में पता चला कि हर OTP के लिए एवरेज 100 रुपये चार्ज किए जा रहे थे। पुलिस का यह भी दावा है कि WhatsApp अकाउंट एक्टिवेट करने के लिए करीब 900 OTP औसतन 250 रुपये में बेचे गए थे। यह भी पता चला है कि देश के 26 राज्यों से आरोपियों से जुड़े मोबाइल नंबरों के खिलाफ 251 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इसलिए, पुलिस का अनुमान है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक ‘बॉस स्कैम’ तक सीमित नहीं है, बल्कि कई तरह के साइबर क्राइम के लिए डिजिटल सुविधाएं दे रहा है।
जांच में पता चला कि यह नेटवर्क चीन में डेवलप किए गए मैलवेयर का इस्तेमाल कर रहा है। जांच में पाया गया कि यह मैलवेयर हांगकांग से ऑपरेट हो रहा है। पुलिस को यह भी शक है कि नेटवर्क से जुड़ा एक कॉल सेंटर इस्लामाबाद से चलाया जा रहा है। यह भी पता चला है कि फ्रॉड से मिले पैसे को कई देशों में भेजकर उसे ट्रेस करना मुश्किल बनाने की कोशिश की जा रही है।
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