25 दिन ‘डिजिटल गिरफ्त’ में रखकर रिटायर्ड अधिकारी से ठग लिए 1.57 करोड़

वीडियो कॉल के जरिए फर्जी अदालत की सुनवाई भी कराई गई

A retired officer was duped of Rs 1.57 crore after being held in 'digital custody' for 25 days.

मुंबई से डिजिटल अरेस्ट का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अंधेरी के डीएन नगर इलाके में रहने वाले 69 वर्षीय सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को 25 दिनों तक ‘डिजिटल गिरफ्त’ में रखकर 1.57 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोपियों ने खुद को पुलिस और न्यायालय के अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए फर्जी अदालत की सुनवाई भी कराई। पीड़ित को डराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश के नाम का भी इस्तेमाल किया गया।

मुंबई पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलते ही साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अशोक पाल नामक ऑटो-रिक्शा चालक को गिरफ्तार किया है। इस रैकेट में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। आरोप है कि उसने कमीशन के बदले अपने बैंक खाते का उपयोग कर ठगी की रकम ट्रांसफर करने में मदद की।

यह घटना 6 दिसंबर 2025 को शुरू हुई, जब पीड़ित को संजय कुमार गुप्ता नाम के व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया और आरोप लगाया कि पीड़ित के मोबाइल नंबर से आपत्तिजनक एमएमएस भेजे जा रहे हैं। उसने यह भी कहा कि बांद्रा क्राइम ब्रांच में उसके खिलाफ मामला दर्ज है।

इसके बाद कॉल प्रदीप सावंत नाम के दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर किया गया, जिसने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और पीड़ित को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित पुलिस स्टेशन में पेश होने को कहा। आरोपियों ने उस पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया। डर पैदा करने के लिए विजय खन्ना नाम के अधिकारी की जांच का भी हवाला दिया गया।

अपने दावों को सच साबित करने के लिए आरोपियों ने वीडियो कॉल पर फर्जी अदालत बनाई और यह दिखाया कि यह सुनवाई भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. एस. गवई की निगरानी में हो रही है। साथ ही सहयोग न करने पर गिरफ्तारी की धमकी दी गई।

इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित की फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और बचत खाते की राशि जैसी उसकी सारी जमा पूंजी जांच के नाम पर बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर करने को कहा। गिरफ्तारी के डर से पीड़ित ने 8 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 के बीच अलग-अलग लेनदेन में कुल 1.57 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।

रकम ट्रांसफर होने के बाद जब आरोपियों के फोन आना बंद हो गए, तब ठगी का खुलासा हुआ। इसके बाद पीड़ित ने परिवार और परिचितों से चर्चा कर साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।

जांच के दौरान पुलिस ने जब वित्तीय लेनदेन का पता लगाया, तो बड़ी रकम अशोक पाल के बैंक खाते से ट्रांसफर होने की पुष्टि हुई। पूछताछ में उसने कमीशन के बदले अपना खाता इस्तेमाल करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और इस ठगी गिरोह के अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

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