महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) में एक दलित युवक की चाकू से काटकर नृशंस हत्या का मामला सामने आया है। यह घटना गुरुवार देर रात उस समय हुई जब 35 वर्षीय नितिन ने एक चिकन शॉप के पास पेशाब किया, जिस पर दुकान मालिक ने आपत्ति जताई। मामूली कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया और देखते ही देखते तीन लोगों पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया गया।
पुलिस के अनुसार, नितिन (35) अपने भाई सचिन (32) और दोस्त दत्ता जाधव के साथ एक लोकल होटल में खाना खा रहा था। इसी दौरान वह बाहर पेशाब करने निकला। दुकान के मालिक मस्तान उर्फ नन्ना कुरैशी (29) ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।
बहस बढ़ते-बढ़ते हाथापाई में बदल गई, जिसमें सचिन और दत्ता भी शामिल हो गए। गुस्से में मस्तान कुरैशी ने अपनी दुकान में इस्तेमाल होने वाली मीट काटने की धारदार चाकू उठाई और तीनों पर हमला कर दिया। इस हमले में नितिन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि सचिन और दत्ता को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
पुलिस ने इस मामले में कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है — मस्तान उर्फ नन्ना कुरैशी (29), बाबर शेख (32), समीर खान (19), साजिन उर्फ सज्जु कुरैशी (29) और नासिर खान (20)। शुक्रवार (20 जून) को सभी आरोपियों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां ‘तकनीकी कारणों’ से उन्हें जमानत मिल गई।
उप पुलिस आयुक्त प्रशांत स्वामी ने कहा, “हमने आरोपियों को गिरफ्तार किया था और अदालत में पेश किया गया। लेकिन एक तकनीकी त्रुटि के चलते उन्हें जमानत मिल गई है। मामले की दोबारा जांच और क़ानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।”
इस घटना के बाद दलित समुदाय में भारी रोष है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे एक सुनियोजित जातिगत हिंसा बताया है और मांग की है कि आरोपियों पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। स्थानीय नेताओं और संगठनों ने मांग की है कि पीड़ित परिवार को मुआवज़ा दिया जाए और आरोपियों की जमानत रद्द कर उन्हें सख़्त सज़ा दी जाए।
पुलिस और प्रशासन पर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस तरह की घटनाओं में जमानत इतनी आसानी से कैसे मिल जाती है। पीड़ित परिवार और समाज अब न्याय की प्रतीक्षा में है।
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