धर्मस्थल सामूहिक दफन मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। विशेष जांच दल (SIT) को गुमराह करने और झूठे सबूत पेश करने के आरोप में मुख्य व्हिसलब्लोअर को शनिवार (23 अगस्त) को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिस खोपड़ी को सबूत के तौर पर पेश किया गया था, वह फर्जी पाई गई।
गिरफ्तार आरोपी धर्मस्थल मंदिर प्रशासन में काम कर चुका एक पूर्व सफाईकर्मी है। उसने दावा किया था कि 1998 से 2014 के बीच उसने 70–80 शवों को अलग-अलग जगहों पर दफनाया था। SIT ने उससे शुक्रवार रात से शनिवार (23 अगस्त) सुबह 6 बजे तक पूछताछ की और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले आरोपी को मेडिकल जांच के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। उसे शनिवार शाम को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने SIT को लगभग 15 स्थानों की जानकारी दी थी, लेकिन अब तक सिर्फ एक पुरुष के कंकाल के अवशेष ही मिले हैं। जब इंडिया टुडे टीवी ने उससे इस बारे में सवाल किया तो उसने कहा कि कई दफन स्थल कटाव, जंगल की बढ़ती झाड़ियां और निर्माण कार्य की वजह से मिट गए होंगे। उसने यह भी दावा किया था कि स्थानीय लोग दिन के समय शवों को दफनाते हुए देखते थे, लेकिन कभी किसी ने रोक-टोक नहीं की।
व्हिसलब्लोअर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा था, “मुझे मंदिर का नाम खराब करके क्या मिलेगा? मैं हिंदू हूं और अनुसूचित जाति से हूं।” उसने आगे आरोप लगाया था कि जिन शवों को उसने दफनाया, उनमें कई पर यौन शोषण के निशान थे। इस बाबत उसने मजिस्ट्रेट के सामने भी बयान दर्ज कराया था।
हाल ही में कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने विधानसभा में कहा था कि यदि SIT को शिकायत झूठी साबित होती है तो व्हिसलब्लोअर के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब गिरफ्तारी के बाद यह मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है और SIT की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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