सरकार ने मेटा के साथ बातचीत में इंस्टाग्राम पर शेयर होने वाले बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट (CSAM) पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस बातचीत के बाद सरकार ने कार्रवाई भी की है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इस मुद्दे पर मेटा के साथ सख्त बातचीत की और साफ किया कि CSAM कंटेंट का प्रसार नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और ऐसे मामलों में कोई ‘सेफ हार्बर (कानूनी सुरक्षा)’ नहीं मिलेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने मेटा को समझाते हुए कहा कि उसका मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय कानूनों और नियमों का पालन हो। वह किसी भी तरह से कवरेज को सेंसर या प्रतिबंधित नहीं करना चाहती। IT मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान को दूर करना और सही संतुलन बनाना प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी है।
सरकार से बातचीत के दौरान मेटा ने भी अपना पक्ष रखा और बताया कि उसके एल्गोरिदम और सिस्टम कैसे काम करते हैं। रिपोर्ट में सरकार के हवाले से कहा गया है कि इस मोर्चे पर विचार-विमर्श चल रहा है और ऐसे मामलों में निर्णय लेने और बदलाव करने की जरूरत है।
व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि व्हाट्सएप यूजरनेम का मामला जांच के दायरे में है और यह सिर्फ इसी प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। AI लेबलिंग पर, मंत्रालय के एक अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि कानून स्पष्ट है कि सिंथेटिक रूप से बनाए गए कंटेंट पर लेबल लगाया जाना चाहिए। ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा ‘इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट’ की धारा 79 के तहत मिलती है। यह इंटरमीडियरीज (मध्यस्थों) को उनके प्लेटफॉर्म पर होस्ट किए गए थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराए जाने से बचाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र को भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान भी बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ सुरक्षा उपायों का पालन करने में सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज की कथित चूक का मामला भी सामने आया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने सरकार को नोटिस जारी किया और बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण से बचाने की चिंताओं को उठाने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि उसके सामने लाए गए मुद्दे गंभीर चिंता का विषय हैं और उन पर पूरी और गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
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