कांवड़ यात्रा में दंगा भड़काने की साजिश नाकाम; तीन आरोपी गिरफ्तार

पाकिस्तान लिंक वाले मुज़फ्फरनगर मॉड्यूल का पर्दाफाश

कांवड़ यात्रा में दंगा भड़काने की साजिश नाकाम; तीन आरोपी गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले से सामने आए एक बड़े राष्ट्रविरोधी साजिश का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 21 जुलाई 2025 को एक ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, जिसका मकसद कांवड़ यात्रा के दौरान साम्प्रदायिक तनाव फैलाकर दंगा और आतंकवादी हमला भड़काना था। इस मामले में तीन आरोपियों — नदीम, मनशेर और रहीस — को ककरौली थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये सभी मुज़फ्फरनगर के ककरौली गांव के निवासी हैं।

पुलिस जांच में सामने आया कि इन आरोपियों ने पाकिस्तान के मुज़फ्फरगढ़ जिले में अप्रैल 2024 में हुई एक जघन्य घरेलू हत्या की वीडियो क्लिप को भारत में घटित बताकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। वीडियो में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और 7 बच्चों को कुल्हाड़ी से बेरहमी से काट दिया था। इस वीडियो को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के उद्देश्य से मुरादाबाद जिले के मंसूरपुर गांव की बताकर प्रचारित किया गया और बजरंग दल पर ‘मुस्लिम बच्चों की हत्या’ का फर्जी आरोप लगाया गया।

इस झूठी जानकारी के साथ एक भड़काऊ ऑडियो भी प्रसारित किया गया, जिसमें मुस्लिमों की हत्या के झूठे दावे कर अधिक से अधिक लोगों को वीडियो शेयर करने की अपील की गई। यह सामग्री विशेष रूप से सावन के महीने में, दूसरे सोमवार के दिन वायरल की गई ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक भावना को भड़काया जा सके।

डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस वीडियो का पाकिस्तान से आना इस बात की ओर इशारा करता है कि इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की भी भूमिका हो सकती है। पुलिस ने संभावित “लोन वुल्फ” टेरर अटैक की आशंका जताई है, जो धार्मिक उन्माद के माहौल में अंजाम दिया जा सकता था।

पुलिस के अनुसार, इस भड़काऊ वीडियो और ऑडियो क्लिप को पाँच प्रमुख व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से साझा किया गया था। इनमें “Khidmat Abbasi Group” (450 सदस्य, मेरठ), “Proud Indian Muslims” (450 सदस्य, मुरादाबाद), “Muslim Samaj Zindabad” (150 सदस्य, मुज़फ्फरनगर), “All India Employer Group” (850 सदस्य), और “Kakrauli Yuva Ekta” (150 सदस्य, मुज़फ्फरनगर) शामिल हैं।

इन ग्रुप्स के ज़रिए सैकड़ों लोगों तक वीडियो और अफवाहें पहुंचाई गईं, जिससे धार्मिक उन्माद भड़काने की साजिश रची जा सके। इसके अतिरिक्त पुलिस ने यह भी बताया कि कई अन्य राज्यों और ग्रुप्स की भूमिका की जांच की जा रही है, ताकि इस मॉड्यूल से जुड़े सभी लोगों की पहचान की जा सके और उन पर कार्रवाई की जा सके।

ककरौली थाने में आरोपियों के खिलाफ FIR संख्या 111/2025 दर्ज की गई है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 55/61(2)/103(2)/113(3)/147/152/196/197/299/351(3)/353(2), UAPA की धारा 13 और IT एक्ट की धारा 67 शामिल हैं। उनके पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनका फॉरेंसिक और वॉइस एनालिसिस कराया जा रहा है।

पुलिस ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी भड़काऊ या झूठी सामग्री को बिना सत्यापन के आगे न भेजें। ऐसा करना कानूनन अपराध है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।मुज़फ्फरनगर पुलिस की तत्परता से देश में एक बड़े स्तर पर दंगे और आतंक फैलाने की साजिश को विफल किया गया। यह घटना स्पष्ट करती है कि कैसे सोशल मीडिया को हथियार बनाकर देश के भीतर अशांति फैलाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका जड़ विदेशी दुश्मनों से भी जुड़ा हो सकता है।

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