उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के एडमिनिस्ट्रेशन को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यूनिवर्सिटी के कुछ कर्मचारियों और डॉक्टरों, जिनमें रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन मलिक और मोहम्मद आदिल शामिल हैं, पर हिंदू छात्राओं के कथित धर्मांतरण, लव जिहाद, मानसिक उत्पीड़न और यौन शोषण का आरोप लगा है। इस मामले में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट के आधार पर, दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ डिपार्टमेंटल कार्रवाई का आदेश दिया गया है। यूनिवर्सिटी को भी सरकार को की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है।
25 अक्टूबर, 2026 को तैयार की गई STF रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी, गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट की कई शिकायतों का जिक्र है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन मलिक और मोहम्मद आदिल के खिलाफ महिला डॉक्टरों और नर्सों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। डॉ. देवरती मित्रा ने रमीज़ुद्दीन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने लव अफेयर्स के ज़रिए उन्हें मेंटली और फिजिकली अब्यूज़ किया और उन पर इस्लाम कबूल करके शादी करने का दबाव डाला। इस मामले में रमीज़ुद्दीन को जनवरी 2026 में अरेस्ट किया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूनिवर्सिटी के तहत विशाखा कमेटी ने भी उन्हें दोषी पाया था।
STF ने यह भी कहा है कि डिपार्टमेंट के हेड सुरेश बाबू और एडिशनल प्रोफेसर सुमैया कय्यूम ने आरोपियों को बचाया, जबकि उन्होंने शिकायत करने वाले डॉक्टरों को बदनाम करके शिकायतों को दबाने की कोशिश की। रिपोर्ट में यह भी आरोप है कि कुछ टीचरों ने हिंदू स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव किया और मुस्लिम स्टूडेंट्स को खास छूट दी।
गांधी वार्ड में, कर्मचारी नफीस और फरकान पर महिला नर्सों को लव ट्रैप में फंसाकर उनका शोषण करने और उन पर धर्म बदलने का दबाव डालने का आरोप है। शफात अली खान पर माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट में एक महिला कर्मचारी ज्योति राव को परेशान करने और उस पर धर्म बदलने और शादी करने का दबाव डालने का आरोप है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में दो महिला रेजिडेंट डॉक्टरों पर धर्म बदलने का दबाव डाला गया और उन्हें एग्जाम में फेल करने की धमकी दी गई।
STF रिपोर्ट में आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज और लखनऊ के KGMU के कुछ मुस्लिम स्टूडेंट्स और डॉक्टरों के एक कथित ऑर्गनाइज़्ड ग्रुप का ज़िक्र है। आरोप है कि यह ग्रुप हिंदू महिला डॉक्टरों से नज़दीकियां बनाकर धार्मिक विचारों को प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस ग्रुप को कुछ टीचरों से मदद मिल रही है।
STF ने दावा किया है कि धर्मांतरण की शिकायतों की जांच कर रही कमेटियां कुछ खास लोगों के असर में हैं और शिकायतों पर सही कार्रवाई नहीं की जा रही है। यूनिवर्सिटी के कुछ सीनियर अधिकारियों, प्रोफेसरों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की गई है।
महिला डॉक्टरों के धर्मांतरण के लिए 15 लाख रुपये
रिपोर्ट में आरोप है कि रमीज़ुद्दीन मलिक कथित धर्मांतरण के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच में यह दावा सामने आया है कि डॉक्टरों का धर्मांतरण कराने पर 15 लाख रुपये और दूसरे लोगों का धर्मांतरण कराने पर 5 लाख रुपये का इनाम दिया जा रहा है। यह भी बताया गया है कि उसके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर करीब 50 महिलाओं की तस्वीरें मिलीं।
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