उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में महज ढाई साल की मासूम बच्ची के साथ हुए अपहरण और दुष्कर्म के मामले ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। इस सनसनीखेज वारदात के आरोपी दीपक वर्मा को शुक्रवार (6 जून)सुबह पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान सीसीटीवी फुटेज के ज़रिए की गई, जिसमें वह मासूम को स्कूटर पर ले जाता हुआ दिखा। जांच में सामने आया कि दीपक वर्मा एक आदतन अपराधी था, जिसके खिलाफ शहर के कई थानों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
5 जून की सुबह लखनऊ के आलमबाग इलाके से बच्ची के लापता होने की सूचना मिली। बच्ची अपने माता-पिता के साथ चंदानगर मेट्रो स्टेशन के पास रहती थी। जब बच्ची नहीं मिली तो परिजनों ने तलाश शुरू की। कुछ देर बाद बच्ची बेहोशी की हालत में एक मेट्रो पुल के नीचे मिली। परिजनों ने उसे तुरंत लोकबंधु अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांच टीमों का गठन किया और आरोपी की गिरफ्तारी पर ₹1 लाख का इनाम घोषित किया गया।
डीसीपी (मध्य क्षेत्र) आशीष श्रीवास्तव ने बताया, “सीसीटीवी फुटेज से आरोपी की पहचान दीपक वर्मा के रूप में हुई। शुक्रवार (6जून) सुबह छावनी क्षेत्र के देवी खेड़ा में आरोपी को पकड़ने की कोशिश की गई। आत्मसमर्पण के लिए कहने पर उसने पुलिस पर गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया और अस्पताल में उसकी मौत हो गई।”
इस अमानवीय घटना से पूरा शहर आक्रोशित है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना हो रही है, लेकिन समाज में बच्चियों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी गहराई है। सरकार और समाज को इस तरह की घटनाओं से सीख लेकर और ज़्यादा सतर्कता, निगरानी और संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है।
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