दिल्ली में पिछले हफ्ते हुए विस्फोट की जांच एक ऐसे आतंकी नेटवर्क के दरवाज़े खोल रही है, जिसकी जड़ें कई साल पीछे तक फैली हुई थीं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह हमला कई वर्षों से तैयार किए जा रहे एक बड़े आतंकवादी ब्लूप्रिंट का हिस्सा था और इस मॉड्यूल के भीतर केंद्र में “मैडम सर्जन” नाम से मशहूर 43 वर्षीय डॉ. शाहीन शाहिद थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में पता चला है कि डॉ. शाहीन ने छह भारतीय शहरों में समन्वित आतंकी हमलों की योजना बनाई थी। डिजिटल सबूत, हस्तलिखित डायरी, कोडेड नोट्स और वित्तीय लेन-देन उनके खिलाफ केस का मुख्य आधार बन गए हैं। उनकी डायरी के कुछ पन्नों में 6 दिसंबर को बड़े हमले का ज़िक्र है, जिसे 1992 की बाबरी मस्जिद ध्वंस का बदला लेने वाली तारीख के रूप में चिन्हित किया गया था।
नोट्स में “D-6 Mission” शीर्षक के तहत टारगेट लिस्ट, भर्ती संदेश, फंड रूटिंग और गुप्त संचार के तरीकों का विस्तृत ब्योरा मिला है।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, शाहीन के साथ कश्मीरी डॉक्टर मुज़म्मिल अहमद गनी और उमर उन नबी को भी भूमिकाएं आवंटित थीं। एक ₹20 लाख की हवाला चैन का पता चला, जो JeM हैंडलर के जरिए ऑपरेशनल खर्चे, भर्ती, सुरक्षित ठिकाने, एन्क्रिप्टेड फोन और रेकी पर खर्च होने का संदेह है। यह तीनों 2021 में एक गहरे जैश-ए-मोहम्मद समर्थित नेटवर्क में शामिल हुए थे।
जांच टीम अब शाहीन के कानपुर, लखनऊ और दिल्ली के बैंक खातों की छानबीन कर रही है।हर बड़े ट्रांजैक्शन, कैश विदड्रॉल और संदिग्ध जमा की फोरेंसिक ऑडिट की जा रही है।
जांच के अनुसार शाहीन की कहानी लगभग 15 साल पहले शुरू होती है, 2010 में विदेश में मौजूद एक भारतीय मूल के डॉक्टर से संपर्क के बाद शाहीन के विचारों में कट्टर बदलाव। 2015–16 में उसने जैश ए मुहम्मद के सर्कल में प्रवेश किया। 2021 में वह पाकिस्तान-समर्थित स्ट्रक्चर्ड प्रोजेक्ट का हिस्सा बनीं। मार्च 2022 में इस मॉड्यूल ने तुर्की दौरा किया, ISI हैंडलर अबू उक़ासा से मुलाकात की और 6 दिसंबर योजना को ‘ग्रीन सिग्नल’ पाया।
उनके GSVM मेडिकल कॉलेज, कानपुर के सहकर्मियों ने बताया कि वह कम बोलने वाली, ड्यूटी पर नियमित और अपने बच्चे को साथ रखने वाली डॉक्टर थीं। दिसंबर 2013 में वह अचानक छुट्टी पर गईं और कभी लौटीं नहीं। 2021 में कॉलेज ने उन्हें सेवा से हटा दिया। पूछताछ में सामने आया कि शादी, नौकरी और परिवार से दूरी बनाने के कारणों पर जब एक रिश्तेदार ने सवाल किया, तो शाहीन ने कहा था,“मैंने अपने लिए काफी जी लिया। अब अपनी कौम का कर्ज उतारने का समय है।”
अब जांच एजेंसियों का मानना है कि दिल्ली धमाका मॉड्यूल का पूरा लक्ष्य नहीं था। बल्कि इसके जरिए एक बड़े, अत्यधिक समन्वित 6 दिसंबर मिशन की राह बनाई जा रही थी। दिल्ली विस्फोट के बाद मॉड्यूल की कई परतें खुली हैं, जिनसे JeM के “मेडिक्स नेटवर्क” की संरचना और गहराई अब उजागर हो रही है। एजेंसियां आने वाले दिनों में तुर्की यात्रा, हवाला फंडिंग, सुरक्षित ठिकानों और पाकिस्तान-आधारित हैंडलरों की भूमिका की गहन जांच जारी रखेंगी।
फिलहाल, सारे संकेत बताते हैं कि दिल्ली का ब्लास्ट एक बहुत बड़े आतंकी प्लान की पहली कड़ी था और उसका केंद्र थी “मैडम सर्जन”।
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