उत्तर प्रदेश में आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के तहत एक बड़ी सफलता का दावा करते हुए यूपी पुलिस की एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने नोएडा से दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े नेटवर्क के इशारे पर राज्य में टारगेट किलिंग की साजिश रचने का आरोप है। वहीं इनमें से एक आरोपी के परिजनों का दावा है की, संदिग्ध मानसिक रूप से बीमार है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ‘तुषार चौहान’ उर्फ हिज्बुल्लाह खान और दूसरे की पह्चान समीर खान के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि दोनों संदिग्ध पाकिस्तान स्थित गैंगस्टरों शाहज़ाद भट्टी और आबिद जाट के संपर्क में थे और उनके निर्देश पर काम कर रहे थे। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने राज्य के कई हाई-प्रोफाइल लोगों की हत्या की योजना बनाई थी। इसके लिए कथित तौर पर भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर एक स्लीपर सेल तैयार करने की कोशिश की जा रही थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, हिज्बुल्लाह खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर शाहज़ाद भट्टी से संपर्क किया था। उसे कथित तौर पर हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए 3 लाख रुपये की पेशकश की गई थी और हथियार के रूप में हैंड ग्रेनेड व पिस्तौल के इस्तेमाल की योजना थी। वहीं, समीर खान पर प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (TTH) की विचारधारा का प्रचार करने का आरोप है।
पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपियों ने पिछले कुछ महीनों में कई लोगों को फोन पर धमकियां दी थीं और इन कॉल्स के दौरान पाकिस्तानी हैंडलर्स को भी कॉन्फ्रेंस कॉल में शामिल किया जाता था।
ATS ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से एक पिस्तौल, पांच जिंदा कारतूस और एक चाकू बरामद किया है। इस मामले में लखनऊ स्थित ATS थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की पहचान के लिए आरोपियों की कस्टडी रिमांड मांगी है और मामले की जांच जारी है।
गिरफ्तारी के एक दिन बाद आरोपी हिज्बुल्लाह खान के परिवार ने पुलिस के आरोपों को “गंभीर गलती” बताया है। हिज्बुल्लाह खान मां ने दावा किया कि उनका बेटा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है और स्वयं की देखभाल करने में भी सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं अब भी उसे नहलाती हूँ, भले ही वह 20s की उम्र में है। मेरा बेटा ट्रीटमेंट में है…वह अपनी ज़िंदगी भी मैनेज नहीं कर पा रहा है…वह आतंकवादी कैसे हो सकता है?”
परिवार के मुताबिक, मेडिकल दस्तावेजों में उसे “कंडक्ट डिसऑर्डर” से पीड़ित बताया गया है, जिसमें आक्रामक व्यवहार और नियमों के उल्लंघन जैसी समस्याएं शामिल होती हैं। पिता ने भी कथित कट्टरपंथ और विदेशी संपर्कों के दावों पर पर कहा कि उनका बेटा अधिकतर समय कमरे में रहता था और ऑनलाइन गेम खेलता था।
हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने परिवार के इन दावों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश ने कहा, “पूरी जांच के बाद ही यह पता चला कि दोनों लोग पाकिस्तान के टेरर मॉड्यूल के असर में थे और हार्डकोर टेररिस्ट बन रहे थे।” फिलहाल, मामले की जांच जारी है और एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के अन्य पहलुओं को खंगाल रही हैं।
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