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Thursday, April 30, 2026
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नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: दोषी शरद कलस्कर को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत!

पुणे की विशेष न्यायालय ने साल 2024 में शरद कलस्कर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को कलस्कर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

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अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में दोषी शरद कलस्कर को बॉम्बे हाईकोर्ट से बुधवार को जमानत मिल गई।

पुणे की विशेष न्यायालय ने साल 2024 में शरद कलस्कर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को कलस्कर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अपील पर अंतिम फैसला आने तक जमानत देने की मांग कलस्कर की ओर से की गई थी।

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की पीठ ने बुधवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कलस्कर की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। जांच एजेंसी ने इस फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने 50 हजार रुपए के मुचलके पर शरद की जमानत मंजूर कर ली।

20 अगस्त, 2013 को डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की पुणे के महर्षि विट्ठल रामजी ब्रिज पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुणे की सत्र अदालत ने 2024 में अंदुरे और कलस्कर को दोषी ठहराते हुए डॉ. वीरेंद्र तावड़े, विक्रम भावे और वकील संजीव पुनालेकर को बरी कर दिया था।

डॉ नरेंद्र दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर ने इन तीनों की रिहाई को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इसके अलावा, दाभोलकर परिवार ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत अंदुरे और कलस्कर को बरी किए जाने के फैसले को भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। मुक्ता का मानना ​​है कि उनके पिता की हत्या सुनियोजित थी और इसमें एक बड़ी साजिश शामिल थी।

मुक्ता ने अपनी अपील में यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने डॉ. नरेंद्र दाभोलकर को खत्म करने की साजिश रची थी, जिन्होंने सनातन संस्था, हिंदू जन जागरण समिति और अन्य समान संगठनों के खिलाफ अपने कड़े विचार व्यक्त किए थे।

सत्र न्यायालय यह समझने में विफल रहा कि इस मामले में दोषी ठहराए गए और बरी किए गए तीनों आरोपी दक्षिणपंथी सनातन संस्था के सदस्य थे या उससे जुड़े हुए थे।

कलस्कर कॉमरेड गोविंद पानसरे हत्याकांड में भी आरोपी हैं। यह मामला अभी भी चल रहा है और अक्टूबर 2025 में उच्च न्यायालय की कोल्हापुर बेंच ने कलस्कर के साथ डॉ. वीरेंद्र सिंह तावड़े और अमोल काले को जमानत दे दी थी।

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