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निठारी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को आखिरी लंबित मामले में किया बरी

तत्काल रिहाई का आदेश

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2006 में देश को हिला देने वाले निठारी हत्याकांड में मंगलवार(11 नवंबर) को एक बड़ा न्यायिक मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को उसके आखिरी लंबित मामले में भी बरी करते हुए उसकी सजा को निरस्त कर दिया। अदालत ने आदेश दिया है कि यदि उस पर किसी अन्य मामले में गिरफ्तारी नहीं है, तो उसे तुरंत रिहा किया जाए। यह फैसला कोली की लगभग 19 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है।

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आदेश पढ़ते हुए कहा, “क्यूरेटिव पिटीशन को स्वीकार किया जाता है। याचिकाकर्ता को सभी आरोपों से बरी किया जाता है। उसे तुरंत रिहा किया जाए।”

कोली ने 2011 में आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी जिसमें उसे दोषी ठहराया गया था। उसके वकीलों ने दलील दी कि जिन सबूतों के आधार पर उसे दोषी ठहराया गया था, उन्हीं सबूतों को बाद में 12 अन्य मामलों में अविश्वसनीय माना गया, जिसके चलते इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे 2023 में बरी कर दिया था। बाद में 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन बरी आदेशों को बरकरार रखा।

तत्काल रिहाई का आदेश

दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गाँव में एक नाली के पास कई बच्चों और महिलाओं के कंकाल व अवशेष बरामद हुए थे। यह घर व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर का था, और सुरेंद्र कोली उसके घर में घरेलू सहायक के रूप में काम करता था। उन दोनों पर 2005 से 2006 के बीच बच्चों और महिलाओं को अगवा, दुष्कर्म और हत्या करने का आरोप लगाया गया था। यह मामला देशभर में आक्रोश का कारण बना था।

2010 में ट्रायल कोर्ट ने कोली और पंढेर को मौत की सजा सुनाई थी। लेकिन अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि जांच में गंभीर खामियाँ थीं और साक्ष्य भरोसेमंद नहीं थे, जिसके आधार पर दोनों को कई मामलों में बरी कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम आदेश के साथ अब कोली कानूनी रूप से सभी मामलों में रिहा है। हालांकि यह मामला भारत की न्याय व्यवस्था, जाँच प्रक्रिया और बाल सुरक्षा तंत्र पर गहरे प्रश्न छोड़ जाता है। निठारी कांड अब भी भारतीय समाज की स्मृति में एक काला अध्याय बना हुआ है।

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