कॉर्पोरेट जिहाद मामले में राज्य सरकार, डीजीपी और टीसीएस अधिकारियों को नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जारी किए विशेष निर्देश

कॉर्पोरेट जिहाद मामले में राज्य सरकार, डीजीपी और टीसीएस अधिकारियों को नोटिस

Notice to State Government, DGP and TCS officials in Corporate Jihad case

नासिक में सामने आए यौन उत्पीड़न और कथित इस्लामी धर्मांतरण जिहाद मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पुलिस आयुक्त, श्रम आयुक्त, टीसीएस के अधिकारियों और महाराष्ट्र के डीजीपी को नोटिस जारी किया है। NHRC ने महाराष्ट्र सरकार, टीसीएस और राज्य के डीजीपी को इस संबंध में विशेष निर्देश भी दिए हैं।

नोटिस में कहा गया है, “माननीय सदस्य श्री प्रियांक कानूंगो की अध्यक्षता में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पीठ ने इस मामले में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराने के निर्देश देते हुए पुलिस महानिदेशक, महाराष्ट्र, मुंबई; पुलिस आयुक्त, नासिक, महाराष्ट्र; श्रम आयुक्त, महाराष्ट्र सरकार, मुंबई; तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस, मुंबई को नोटिस जारी करने के निर्देश रजिस्ट्री को दिए गए हैं।”

NHRC ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह टीसीएस की देशभर की सभी शाखाओं, उनके बीपीओ यूनिट्स, सहायक कंपनियों और संबद्ध कंपनियों का पूरा विवरण, साथ ही उनके पंजीकरण या लाइसेंस से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराए। नोटिस में कहा गया है कि श्रम आयुक्त, महाराष्ट्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत में टीसीएस की सभी इकाइयों का विवरण, जिसमें कंसल्टेंसी सर्विसेस, बीपीओ, सहायक और संबद्ध कंपनियां शामिल हैं, संबंधित श्रम कानूनों के तहत पंजीकरण/लाइसेंस की जानकारी सहित प्रस्तुत किया जाए।

NHRC ने टीसीएस को पॉश (POSH) समिति का विवरण, उसकी नियुक्ति प्रक्रिया, पिछले तीन वर्षों की कार्यप्रणाली की रिपोर्ट, पिछले तीन वर्षों में प्राप्त शिकायतों की प्रतियां, तथा एलआरओ द्वारा अपनी शिकायत में उल्लेखित पूर्व कर्मचारियों के सभी बयान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

इसके अलावा आयोग ने महाराष्ट्र के डीजीपी को इस मामले में दर्ज एफआईआर का विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि टीसीएस नासिक के ऑपरेशंस हेड को मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया है या नहीं। साथ ही, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सात दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी लिया स्वतः संज्ञान

15 अप्रैल को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने टीसीएस नासिक के कथित ग्रूमिंग जिहाद मामले का स्वतः संज्ञान लेने की घोषणा की। आयोग ने इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की है, जिसमें मुंबई उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व डीजीपी बी. के. सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोरा और राष्ट्रीय महिला आयोग की वरिष्ठ समन्वयक लीलाबती शामिल हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा, “महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) के बीपीओ यूनिट में महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित गंभीर मीडिया रिपोर्ट्स का आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। धार्मिक प्रथाओं से जुड़ी एक शिकायत के आधार पर शुरू हुई प्रारंभिक जांच में पर्यवेक्षी पदों पर बैठे कुछ व्यक्तियों द्वारा महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, बलात्कार और जबरन धर्मांतरण के प्रयास के चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं।”

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