ऑपरेशन कालनेमि: कावड़यात्रा में बांग्लादेशी समेत शामिल 127 नकली साधु गिरफ्तार !

ऊधमसिंहनगर जिले के विभिन्न इलाकों से अब तक 66 संदिग्ध फर्जी बाबाओं को हिरासत में लिया गया है।

ऑपरेशन कालनेमि: कावड़यात्रा में बांग्लादेशी समेत शामिल 127 नकली साधु गिरफ्तार !

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उत्तराखंड पुलिस ने कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी कार्रवाई करते हुए 127 फर्जी साधुओं को गिरफ्तार या हिरासत में लिया है। इन पर आरोप है कि ये बाबा या साधु के वेश में श्रद्धालुओं को धोखा दे रहे थे। यह कार्रवाई राज्यभर में चल रहे ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत की गई है, जिसका मकसद श्रद्धालुओं को ठगों से बचाना और धार्मिक वातावरण की पवित्रता बनाए रखना है।

उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि ये गिरफ्तारियाँ देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जिलों में की गईं। देहरादून जिले में पिछले दो दिनों में ही 61 फर्जी साधु पकड़े गए हैं, जिनमें से 17 अकेले ऋषिकेश से गिरफ्तार किए गए। देहरादून वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने जानकारी दी कि शनिवार को 23 और शुक्रवार को 38 लोगों को जिले के अलग-अलग हिस्सों से पकड़ा गया। इनमें 7 से 8 दूसरे धर्म के लोग भी पकडे गए है।

इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने सहसपुर क्षेत्र से एक बांग्लादेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया, जो साधु के वेश में छिपकर रह रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी का नाम रकाम है और वह ढाका के पास स्थित टांगाइल ज़िले का रहने वाला है। वह करीब 7 महीने पहले देहरादून पहुंचा था और खुद को साधु बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था।

ऊधमसिंहनगर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने बताया कि जिले के विभिन्न इलाकों से अब तक 66 संदिग्ध फर्जी बाबाओं को हिरासत में लिया गया है। इन सभी से पूछताछ जारी है और उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

ऑपरेशन कालनेमि नामक इस विशेष अभियान का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के दौरान समाज विरोधी और धोखेबाज तत्वों की पहचान करना और उन्हें क़ानून के दायरे में लाना है। ‘कालनेमि’ का प्रतीकात्मक उपयोग धोखाधड़ी और छल करने वालों के लिए किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभियानों से कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों की पवित्रता बनी रहेगी।

उत्तराखंड पुलिस की यह कार्यवाही न केवल कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह धार्मिक स्थलों को धोखाधड़ी और छद्म साधु-संतों से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह भी स्पष्ट संकेत है कि अब धार्मिक वेशभूषा के नाम पर किसी को कानून से बचने का मौका नहीं मिलेगा।

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