पंजाब के फिरोजपुर में 15 नवंबर को हुए एक सनसनीखेज हमले में 32 वर्षीय नवीन अरोड़ा, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के तीसरी पीढ़ी के स्वयंसेवक थे, की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दो बाइक सवार हमलावरों ने मोची बाजार क्षेत्र में वारदात को अंजाम दिया। नवीन अरोड़ा, बलदेव राज अरोड़ा के पुत्र और दिवंगत वरिष्ठ RSS नेता व सामाजिक कार्यकर्ता दीनानाथ के पोते थे।
घटना के बाद, खालिस्तान समर्थक संगठन ‘Sher-e-Punjab Brigade’ ने सोशल मीडिया पोस्ट जारी कर हत्या की जिम्मेदारी ली और इसे अपने “कथित खालिस्तान संघर्ष” का हिस्सा बताया। समूह ने घोषणा की कि वह पंजाब की “आजादी” के लिए संघर्ष तेज करेगा और संघ, शिव सेना, पुलिस, सेना तथा “दिल्ली सरकार के एजेंटों” पर हमले जारी रखने की धमकी दी।
समूह ने अपने बयान में कहा, “नवीन अरोड़ा, जो RSS से जुड़े थे और हिंदू सरकार के मोहरे की तरह पंजाब में हिंदुत्व फैलाने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें आज ठीक कर दिया गया है।” पोस्ट में बलदेव राज अरोड़ा और उनके परिवार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए, जिनमें 1984 के बाद कथित उकसावे का दावा शामिल है। बयान “प्रवक्ता” बहादुर सिंह संधू के नाम से जारी किया गया और इसके “कमांडर” परमजीत सिंह के हस्ताक्षर का दावा किया गया।

हत्या के विरोध में स्थानीय व्यापारियों ने बाजार बंद कर पीड़ित परिवार के प्रति एकजुटता जताई। व्यापारिक संगठनों ने इसे पंजाब में बढ़ते असुरक्षा माहौल का प्रमाण बताया। इस घटना ने राज्य की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। पंजाब BJP प्रमुख सुनील जाखड़ ने AAP सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि यह हत्या एक बार फिर साबित करती है कि राज्य में “कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।” जाखड़ के अनुसार, “मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब को दिशा हीन छोड़ दिया है और सत्ताधारी दल से जुड़े गैंगस्टर खुलेआम सक्रिय हैं।”
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि “एक इतने हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई,” जबकि अन्य मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया जा रहा है। बिट्टू ने कहा, “मुख्यमंत्री को जवाब देना होगा कि पुलिस अपराध रोकने में क्यों विफल हो रही है।”
पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हमलावरों की तलाश चल रही है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती 24 घंटे तक पुलिस को न तो हमलावरों की पहचान का पता था और न ही उनकी मंशा का, जो दिखाता है कि घटना पूरी तरह योजनाबद्ध थी।
फिरोजपुर की यह हत्या न सिर्फ राज्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, बल्कि पंजाब में सक्रिय उग्रवादी तत्वों के पुनरुत्थान को लेकर चिंता भी बढ़ा रही है। जांच एजेंसियां जल्द से जल्द आरोपी तक पहुंचने के प्रयास में जुटी हैं, जबकि घटना ने चुनाव पूर्व पंजाब की राजनीति में नए तनाव पैदा कर दिए हैं।
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