श्रमिक प्रदर्शन में हिंसा के पिछे चौंकाने वाले खुलासे: फर्जी व्हाट्सऐप ग्रुप और भड़काऊ संदेशों के खुलासे

श्रमिक प्रदर्शन में हिंसा के पिछे चौंकाने वाले खुलासे: फर्जी व्हाट्सऐप ग्रुप और भड़काऊ संदेशों के खुलासे

Shocking revelations behind the violence at the labor protests: Fake WhatsApp groups and inflammatory messages exposed

नोएडा के औद्योगिक इलाकों में हालिया श्रमिकों की मांगों को लेकर चल रहे प्रदर्शनों ने चौथे दिन हिंसक मोड़ लिया, जिसको लेकर पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, यह विरोध केवल श्रमिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल माध्यमों के जरिए इसे सुनियोजित तरीके से भड़काया गया। इस संबंध में अब तक सात FIR दर्ज की जा चुकी हैं और अफवाह फैलाने तथा हिंसा भड़काने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि मजदूरों की मांगों से शुरू हुआ यह आंदोलन तेजी से संगठित हिंसा में बदला गया। जिले के 80 से अधिक स्थानों पर एक साथ विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें से कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। कम से कम चार से पांच स्थानों पर आगजनी से औद्योगिक और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा।

व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए लामबंदी का आरोप

पुलिस जांच में सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोगों को रातोंरात अलग-अलग व्हाट्सऐप ग्रुप्स में जोड़ा गया। ये ग्रुप कथित तौर पर क्यूआर कोड के माध्यम से बनाए और प्रसारित किए गए थे। कई ग्रुप्स के नाम श्रमिक संगठनों या मजदूर आंदोलनों से जुड़े हुए थे, जिससे लोगों को जोड़ने में आसानी हुई।

इन ग्रुप्स के भीतर कथित तौर पर भड़काऊ और उकसाने वाले संदेश साझा किए गए, जिनमें प्रदर्शन को तेज करने और टकराव की स्थिति पैदा करने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस का मानना है कि इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए बड़ी भीड़ को कम समय में संगठित किया गया और जमीनी स्तर पर तनाव को बढ़ाया गया।

गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में भी ऐसे संदेशों और गतिविधियों के सबूत मिलने की बात सामने आई है, जिससे इस पूरे घटनाक्रम के पीछे समन्वित रणनीति होने के संकेत मिलते हैं।

सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई हिंसा

हिंसा के दिन सामने आए सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग जबरन फैक्ट्री के गेट तोड़कर अंदर घुसते हुए दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में हमलावरों के हाथों में लाठी-डंडे और लोहे की रॉड देखी गईं। अंदर घुसने के बाद उन्होंने निगरानी कैमरों को भी निशाना बनाया और उन्हें तोड़ दिया, जिससे उनकी पहचान छिपाई जा सके।

एक अन्य घटना में सेक्टर-63 थाने के बाहर भीड़ द्वारा पथराव की खबर सामने आई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और पुलिस पर हमला शुरू कर दिया। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया, जिसने आंसू गैस और लाठीचार्ज के जरिए भीड़ को तितर-बितर किया।

संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) के जवानों को भी तैनात किया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जारी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि हिंसा में शामिल या उसे बढ़ावा देने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा कदम उठाते हुए नोएडा और गाजियाबाद में न्यूनतम मजदूरी में 21 प्रतिशत तक की अंतरिम बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह फैसला हाल ही में गौतमबुद्ध नगर के औद्योगिक क्षेत्रों में हुए श्रमिक आंदोलनों के मद्देनज़र लिया गया है। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल से प्रभावी होगी और इसमें मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता भी शामिल होगा। नई दरों के तहत अकुशल श्रमिकों के लिए मजदूरी 13,690 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये निर्धारित की गई है।

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