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उत्तर प्रदेश: बहराइच सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज की जमीन पर बने 10 अवैध मजारों पर चला बुलडोजर

23 साल पुराना कानूनी विवाद खत्म

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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में वर्षों से चले आ रहे एक कानूनी विवाद का अंत करते हुए जिला प्रशासन ने सोमवार (19 जनवरी) को महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज परिसर और उसके आसपास बनी 10 अवैध मजारों/दरगाहों को ध्वस्त कर दिया। कोतवाली देहात क्षेत्र में स्थित ये संरचनाएं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के रूप में चिन्हित की गई थीं। नगर मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद की गई इस कार्रवाई में हजारों वर्ग फुट जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।

यह कार्रवाई तब तेज हुई जब मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य संजय खत्री ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर शिकायत की कि परिसर के ठीक सामने स्थित आस्ताना रसूल शाह दरगाह और उससे जुड़ी संरचनाओं पर रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। शिकायत में यह भी बताया गया कि दरगाह के चारों ओर बाउंड्री वॉल बना दी गई थी, जिससे कॉलेज की भूमि पर अतिक्रमण और पुख्ता हो गया।

राजस्व विभाग द्वारा वर्ष 2016 में उपलब्ध कराए गए भूमि अभिलेख खसरा-खतौनी, नक्शा और अन्य दस्तावेज में मेडिकल कॉलेज की जमीन पर किसी भी इस्लामिक धार्मिक संरचना का उल्लेख नहीं था। इसके बाद मामला देवीपाटन मंडल के आयुक्त के समक्ष पहुंचा, जिन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड में दर्ज संरचनाओं को छोड़कर बाकी सभी अवैध हैं और उन्हें हटाया जाना चाहिए।

इस मामले की जड़ें वर्ष 2002 तक जाती हैं, जब तत्कालीन जिलाधिकारी ने इन मजारों को अनधिकृत घोषित किया था। प्रबंधन समिति ने जिला अदालत में इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन 2004 में याचिका खारिज कर दी गई। इसके बावजूद, समय के साथ दो मूल संरचनाओं के आसपास कई नई मजारें खड़ी कर दी गईं। वर्ष 2019 में प्रबंधन समिति ने मंडलायुक्त के समक्ष अपील की, लेकिन वहां भी अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए गए।

वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों के अनुसार, केवल दो मजारें ही आधिकारिक रूप से पंजीकृत थीं। इसके बावजूद, बिना किसी अनुमति के 10 से अधिक अतिरिक्त संरचनाएं खड़ी कर दी गईं, जिनकी न तो वक्फ बोर्ड को सूचना दी गई और न ही किसी अन्य सक्षम प्राधिकरण को।ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले विरोध के संकेत मिले, जिसके चलते कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई। प्रशासन के अनुसार, संवाद के जरिए प्रदर्शनकारियों को शांत किया गया और स्थिति नियंत्रण में रही।

नगर मजिस्ट्रेट राजेश प्रसाद ने कहा, “2002 से जारी निर्देशों के बावजूद इन भवनों को नहीं हटाया गया। इन लोगों ने बिना अनुमति 10 से 12 धार्मिक ढांचे धीरे-धीरे बना लिए और बाद में उनका विस्तार भी किया। इन अवैध संरचनाओं के जरिए लगभग 2,000 वर्ग फुट जमीन पर कब्जा किया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया जाएगा।”

उन्होंने बताया कि 10 जनवरी को नोटिस जारी कर 17 जनवरी तक स्वेच्छा से हटाने का अवसर दिया गया था, साथ ही यह स्पष्ट किया गया था कि अनुपालन न होने पर 19 जनवरी को बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी और खर्च भू-राजस्व के रूप में वसूला जाएगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड में पंजीकृत दो मजारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई अदालत और प्रशासनिक आदेशों के अनुपालन में की गई है और सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

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