उत्तर प्रदेश के कानपुर से बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जहां 23 वर्षीय हिंदू युवक दीपक सिंह उर्फ रोहित ने जबरन धर्मांतरण के दबाव से आहत होकर आत्महत्या कर ली। यह घटना 29 जनवरी (गुरुवार) को पनकी थाना क्षेत्र के रतनपुर पुलिस चौकी इलाके की बताई जा रही है। मृतक ने फांसी लगाने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जो अगले दिन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो में दीपक सिंह खुद को “दीपक सिंह गौर” बताते हुए कहते हैं, “मुझ पर धर्म बदलने का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन मैं अपने विश्वास के प्रति वफादार रहूंगा। जो भी यह वीडियो देख रहा है, उससे मेरी एक ही अपील है। भारत में गांजा पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए और महिलाओं को सम्मान मिलना चाहिए। मैंने जीवन में कई गलतियां की हैं, इसके लिए सबसे माफी मांगता हूं। मैं आत्महत्या करने की सोच रहा हूं। पूरे भारत में धर्मांतरण हो रहे हैं।”
परिजनों का आरोप है कि आत्महत्या से पहले दीपक के साथ मारपीट की गई थी और उसे जबरन एक मज़ार पर ले जाया गया था। मृतक की बहन निशा सिंह के अनुसार, दीपक 26 जनवरी को उनसे मिलने लखनऊ आया था। रास्ते में उसने कॉल उठाना बंद कर दिया। बाद में जब वह लखनऊ पहुंचा, तो बेहद डरा और रोता हुआ मिला। उसने बताया कि ट्रेन में चार लोगों ने उसे परेशान किया, मारपीट की और चारबाग रेलवे स्टेशन के पास एक मज़ार पर जबरन ले गए।
परिवार का कहना है कि दीपक पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में था और धर्म परिवर्तन के दबाव को लेकर उसने पहले भी पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी उपेक्षा और दबाव ने उसे यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि शिकायतों के बावजूद पुलिस की निष्क्रियता ने हालात को और बिगाड़ दिया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, दीपक की मां ने सुबह उसे जगाने की कोशिश की, तब खिड़की के सहारे उसे फांसी पर लटका पाया। पुलिस ने जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से वह वीडियो बरामद किया।
कानपुर पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच के लिए दो टीमें गठित की गई हैं। उन्होंने कहा कि मृतक के वीडियो, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और चारबाग रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है ताकि परिजनों के आरोपों की पुष्टि की जा सके।
दीपक सिंह 12वीं तक पढ़ा-लिखा था और पहले ऑटो चालक के रूप में काम करता था। बाद में वह किराना दुकान चला रहा था। परिवार का कहना है कि अस्पताल ले जाने के बाद भी उसकी जान नहीं बच सकी और शव वापस लाया गया, जिसके बाद परिजनों ने पहले पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया था।
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