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Friday, February 13, 2026
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अब शरद पवार को भी राम मंदिर खटका ?

वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बयानबाजी की जा रही है- शरद पवार

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अयोध्या में तैयार हो रहे राम मंदिर को लेकर बड़ा एलान करते हुए कहा कि 1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर तैयार मिलेगा। गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए कानूनी लड़ाई 135 सालों से ज्यादा लंबी चली है। 15वीं सदी से चली आ रही इस लड़ाई पर साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विराम लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विवादित जमीन पर राममंदिर का निर्माण करने की अनुमति देते हुए मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक ट्रस्ट बनाकर भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। पांच अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था।

राममंदिर न सिर्फ तकनीक बल्कि भव्यता में भी दुनिया के चुनिंदा मंदिरों में शामिल होगा। तीन मंजिला राममंदिर 400 स्तंभों पर टिका है जिसे कुशल कारीगरों द्वारा इन स्तंभों में रामकथा के प्रसंगों सहित कुल 6400 मूर्तियां प्राचीन पद्धति से उकेरी जाएंगी, जो मंदिर को हेरिटेज लुक देने का काम करेंगी। आठ एकड़ में बनने वाले परकोटे में रामकथा के 100 प्रसंगों का चित्रांकन किया जाएगा। मंदिर के हर खंभे में देवी-देवताओं की 16 मूर्तियों को उकेरा गया है।

अब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण अंतिम चरण में है। वहीं अमित शाह ने कर्नाटक और त्रिपुरा में राम मंदिर को लेकर एक बड़ा बयान देने से सियासी हलचल मची हुई है। दरअसल उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2024 को टिकट बुक करा लो रामलला का भव्य मंदिर बन जाएगा। इसके बाद अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने रविवार को अयोध्या में राम मंदिर तैयार होने की तारीख संबंधी गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बयानबाजी की जा रही है। वहीं उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई वाली भारत जोड़ो यात्रा की भी प्रशंसा की और कहा कि इस यात्रा से विपक्षी दलों के बीच आम सहमति बनाने में मदद मिलेगी

सोचनेवाली बात यह है कि आखिरकार शरद पवार किस मुद्दे कि बात कर रहे है। और अमित शाह किस मुद्दे से भटकाने का कार्य कर रहे है। महाराष्ट्र में इस समय जो मुद्दा सबसे ज्यादा सुर्खियों में है वो हैं शिवसेना गुट और शिंदे गुट के बीच होनेवाली तकरार, शिवसेना के प्रति बगावती तेवर अपना कर शिंदे का मुख्यमंत्री बनाना। हालांकि यह मामला तो सियासती है इसमें दूर-दूर तक आमजन का कोई लेना देना नहीं है। महा विकास आघाडी के नजरों में ये मुद्दा बहुत बड़ा मुद्दा है लेकिन ऐसे कई मुद्दे देश के सियासती गलियारों में देखने मिल रही है। राम मंदिर खुलने का ऐलान ये आम जनता के पक्ष में लिया गया फैसला है। जिससे आम जनता में खुशी की लहर उमड़ पड़ी है। राम मंदिर को खोलने का केंद्र सरकार का निर्णय यह महाराष्ट्र के विवादित मुददें को कहा भटका रहा है?

वहीं महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा आदर्श पुरुषों को लेकर नेताओं द्वारा की गई बयानबाजी जिससे विवाद काफी बढ़ा। इस कड़ी में महा विकास आघाडी के कई नेता भी शामिल रहे। इन्ही विवादों के चलते महा विकास आघाडी के नेताओं ने मोर्चा तक निकाला। हालांकि किसी को कोई मतलब नहीं इस तरह के विवाद से क्योंकि ये नेता स्वार्थवश इस तरह के मुद्दे को बढ़ावा देते है। विवाद को बढ़ाने में सभी पार्टियों का योगदान रहा। हालांकि बीजेपी ने गलतियों पर माफी भी मांगी लेकिन महा विकास आघाडी को अपनी गलतियों का कोई अफसोस नहीं हुआ। इस मुद्दे को लेकर सभी आपस में ही एक दूसरे के प्रति विरोधी बने रहे। यह मुद्दा एक सीमा तक है आम जनता को इसमें कोई रुचि नहीं हैं। ये आप लोगों द्वारा पैदा किया गया विवाद है। इसमें अमित शाह का बयान कहा रोड़ा बन रहा है। जो कि इस मुद्दे से लोगों का ध्यान भटका रहा है। आम जनता की रुचि पहले भी नहीं थी और अब भी नहीं है क्यूंकी ऐसा विवाद आप पर ही जमता है।

कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच सीमा को लेकर विवाद। दरअसल महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच बेलगावी व कारवार के कुछ गांवों को लेकर सीमा विवाद है। कर्नाटक में आने वाले इन गांवों की आबादी मराठी भाषी है। महाराष्ट्र में लंबे समय से इन गांवों को राज्य में शामिल किए जाने की मांग की जा रही है। 1960 में महाराष्ट्र की स्थापना के बाद से यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। यह विवाद केवल दो राज्यों तक ही सीमित है और इसमें क्या मुद्दा है जिस पर बात नहीं की गई। एकनाथ शिंदे, देवेन्द्र फड़नवीस, और अमित शाह इन सभी ने इस विवाद में शामिल होकर अपने विचारों को लोगों के समक्ष साझा किया। शरद पवार को कौन समझाएगा की राम मंदिर के निर्माण से सभी देशवासियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। क्या आपको बुरा लग रहा है मंदिर के खुलने से? ये विवाद राज्यों को लेकर बना है तो राम मंदिर के खुलने वाले बयान से क्या ये मुद्दा खत्म हो गया? क्या दोनों राज्यों के लोग आपने इस मुद्दे से भटक गए। शरद पवार dवर दिया गया बयान ये पूरी तरह से बेबुनियाद लगता है।

अभिनेत्री उर्फी जावेद और बीजेपी लीडर चित्रा वाघ के बीच शुरू हुआ विवाद। ये विवाद दो महिलाओं के बीच प्रारंभ हुआ जिसमें कई लोग शामिल हुए। सुष्मा अंधारे, महाराष्ट्र महिला मोर्चा आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर यह सभी इस विवाद में शामिल हुए। एक तरफ से राजनीति और बॉलीवुड के बीच विवाद शरद पवार आपसे पूछना है कि ये कौन सा बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। क्या आम जनता इसमें रुचि ले रही है। नहीं ये सिर्फ दो पक्षों बीच छिड़ने वाला विवाद है। अमित शाह क्या इस तरह के मुद्दे से आम जनता को भटका रहे है। ये मुद्दा देश स्तर पर नहीं बल्कि एक सीमित स्तर पर ही है इसलिए इस तरह के फालतू बातों को आप बड़ा मुद्दा करार दे सकते है। पर वास्तव में ये कोई महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है।

एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार को राम मंदिर खुलने के एलान से मिर्ची क्यों लग रही है? राम मंदिर से हिंदुओं की सभ्यता जुड़ी हुई है आपको क्यों इससे समस्या हो रही है। इस तरह के बयान देकर आप जनता को गुमराह नहीं बल्कि जनता को अपने विरोध में लाने का काम कर रहे है। राम मंदिर से सम्पूर्ण देश जुड़ा हुआ है और आपको समस्या है कि राम मंदिर खोलने के निर्णय आखिरकार कैसे लिए जा रहा है खुद के सियासती खेल में जनता के भावनाओं को ठेस पहुँचाने की गलती ना करें। राम मंदिर खुलने का सपना सभी ने देखा है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव मई 2024 में होनेवाला है। क्या शरद पवार पुनः हिंदुत्ववाद के मुद्दे को लाकर ही हिन्दू वोट बैंक को अपने पक्ष में लेना चाहते है। यह उनकी गलतफहमी है। आप अपने बयान से केंद्र सरकार को टारगेट नहीं कर रहे है बल्कि हिन्दुत्व पर निशान साध रहे है।

हालांकि राम मंदिर को जल्द ही खोलने को लेकर अमित शाह द्वारा दिया गया बयान यह महा विकास आघाडी के नेताओं को नहीं पच रहा है। एक बात तो स्पष्ट है कि अमित शाह द्वारा राम मंदिर को लेकर दिया गया बयान यह आम जनता के लिए एक उम्मीद है। लेकिन कुछ लोग अपने हरकतों से बाज नहीं आने वाले उन्होंने तो यहाँ भी राजनीति ला दी। राज्य स्तर पर जो भी विवाद या मुद्दा चल रहा है उसे कहीं से भी अमित शाह के बयान ने भटकाया नहीं है। एक कहावत है खाली दिमाग शैतान का घर महा विकास आघाडी की सरकार इस समय इसी स्थिति में है तभी वो बिना बातों को बढ़ावा दे रहे है।

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