रणनीतिक नेतृत्व का नया अध्याय – लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ!

1 अप्रैल 2026 से उन्होंने इस पद का कार्यभार संभाल लिया है। कॉर्पोरेट दुनिया में जिसे हम “ऑपरेशन्स एक्सीलेंस” और “स्ट्रेटेजिक थिंकिंग” कहते हैं, उसका बेहतरीन उदाहरण लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का करियर है। 

रणनीतिक नेतृत्व का नया अध्याय – लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ!

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द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर आज तक भारतीय सेना की ताकत और प्रभाव को पूरी दुनिया ने देखा है। वैश्विक सैन्य शक्ति की रैंकिंग में भारतीय सेना चौथे स्थान पर आती है। हाल ही में सेना में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (VCOAS) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पद पर की गई है। मुझे उनसे मिलने और उनसे बातचीत करने का अवसर मिला। इसलिए उनकी नियुक्ति से मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत खुशी हुई है। एक योग्य अधिकारी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए संबंधित लोगों को बधाई देने का मन होता है।

1 अप्रैल 2026 से उन्होंने इस पद का कार्यभार संभाल लिया है। कॉर्पोरेट दुनिया में जिसे हम “ऑपरेशन्स एक्सीलेंस” और “स्ट्रेटेजिक थिंकिंग” कहते हैं, उसका बेहतरीन उदाहरण लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का करियर है।

 जयपुर में उनसे मुलाकात के दौरान यह बात मुझे स्पष्ट रूप से महसूस हुई। मेरे साथ मेरा बेटा विवान भी था। उसने जो किताबें लिखी हैं, उनके बारे में उन्होंने बड़े स्नेह से सुना। विवान ने ‘एस्टेरॉइड’ विषय पर जो काम किया था, उसकी उन्होंने सिर्फ मौखिक प्रशंसा ही नहीं की, बल्कि सेना की ओर से दिया जाने वाला ‘सर्टिफिकेट ऑफ एप्रिसिएशन’ देकर उसका सम्मान भी किया। उनके इस व्यवहार से मैं सचमुच आश्चर्यचकित और भावुक हो गया।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं और अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। अपने क्षेत्र से जुड़ा गहरा तकनीकी ज्ञान और वास्तविक युद्धक्षेत्र का अनुभव उन्हें एक अलग ऊंचाई पर ले जाता है।

सेठ का सैन्य सफर बेहद शानदार रहा है। उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें PVSM, UYSM और AVSM जैसे उच्च सैन्य सम्मानों से सम्मानित किया गया है।
डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में उन्हें ‘बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट’ और ‘सिल्वर सेंच्युरियन’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्रों में आर्मर्ड रेजिमेंट से लेकर जम्मू-कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स तक, विभिन्न भौगोलिक और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नेतृत्व किया है।

1995–96 के दौरान अंगोला में संयुक्त राष्ट्र की शांति मिशन में भाग लेकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी क्षमता का परिचय दिया। देश और विदेश दोनों जगह उन्होंने अपने नेतृत्व की छाप छोड़ी है। जिनकी प्रतिभा असली होती है, वह कहीं भी अपनी पहचान बना लेते हैं।

वाइस चीफ के रूप में उन पर सेना के आधुनिकीकरण की बड़ी जिम्मेदारी होगी। कॉर्पोरेट भाषा में कहें तो बजट ऑप्टिमाइजेशन और फ्यूचर-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

तेजी से बदलते तकनीकी दौर में तेज और सटीक निर्णय लेने की क्षमता उनमें है। इसलिए भारतीय सेना को और अधिक मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अहम रहेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों के साथ उनका समन्वय और संवाद भी बहुत अच्छा है। सभी को साथ लेकर लक्ष्य की ओर बढ़ने की क्षमता उनमें स्पष्ट दिखाई देती है।

जनरल सेठ अक्सर कहते हैं- “अपनी यूनिट का सम्मान, गौरव और प्रतिष्ठा हमेशा सर्वोच्च रखें। कनिष्ठों का ख्याल रखें, वरिष्ठों का सम्मान करें और भारतीय सेना की महान परंपराओं का पालन करते हुए हमेशा आत्मविश्वास और निष्ठा के साथ देश का प्रतिनिधित्व करें।”

यह विचार उनके व्यक्तित्व की झलक दिखाते हैं।

भारतीय सेना की ताकत केवल हथियारों में नहीं, बल्कि अनुभवी और दूरदर्शी नेतृत्व में भी होती है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ निश्चित रूप से इस ताकत को और बढ़ाएंगे। उनके मार्गदर्शन में भारतीय सेना की कॉम्बैट रेडीनेस और आधुनिक तकनीक का उपयोग और अधिक प्रभावी होगा, ऐसा मुझे पूरा विश्वास है।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को इस नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं। भारत माता की सेवा उनके हाथों से और अधिक हो, और हमें उसे देखने का सौभाग्य मिले।

वंदे मातरम्।

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