अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “यह छात्रों के लिए बेहद खुशी का दिन है। सरकार ने आखिरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार किया और धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देकर एक बड़ा फैसला लिया। जब मुझे इस खबर की जानकारी मिली तो मैं भावुक हो गईं। यह छात्रों की जीत है कि आषाढ़ी एकादशी के दिन मिली यह खबर उनके परिवार के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।”
उन्होंने कहा, “पिछले कई सप्ताह मेरे परिवार के लिए बेहद कठिन रहे। आंदोलन के दौरान जब अभिजीत पर हमला हुआ और उसे थप्पड़ मारा गया, तब मैं काफी डर गई थीं। इस घटना के बाद कई दिनों तक नींद नहीं आई और न ही ठीक से खाना खा सकी। 7 जून के बाद से घर का माहौल पूरी तरह बदल गया था और किसी भी काम में मन नहीं लगता था। हर समय अपने बेटे की सुरक्षा की चिंता सताती रहती थी।”
उन्होंने कहा, “इतनी कम उम्र में अभिजीत ने छात्रों की आवाज उठाकर बड़ा काम किया है और मुझे अपने बेटे पर गर्व है। लोगों से लगातार मिल रही सराहना यह साबित करती है कि छात्रों के हित में उठाया गया आंदोलन व्यापक समर्थन हासिल करने में सफल रहा।”
वहीं, अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “छात्रों, उनके अभिभावकों और रिश्तेदारों में लगातार बढ़ते आक्रोश को देखते हुए यह फैसला आवश्यक था। आंदोलन पहले जंतर-मंतर तक सीमित था, लेकिन बाद में देशभर में फैलने लगा था। ऐसे में इस्तीफा देकर सरकार ने बढ़ते तनाव को कम करने का प्रयास किया है।”
भगवानराव ने कहा कि वह अपने बेटे की सेहत और सुरक्षा को लेकर लगातार चिंतित रहे। आंदोलन के दौरान अभिजीत डेंगू और टाइफाइड से भी पीड़ित हो गया था, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई थी।
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