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Wednesday, June 17, 2026
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वायु सेना विकसित करेगी स्वदेशी कामिकेज ड्रोन, भरेंगे ऊंची उड़ान!

वायु सेना ने वन-वे अटैक अनमैन्ड एरियल सिस्टम के लिए भारतीय कंपनियों के चयन हेतु सीमित टेंडर जारी किया है। आईएएफ के अनुसार, यह लंबी दूरी के कामिकाजे ड्रोन 16,000 फीट तक की ऊंचाई पर काम कर सकेंगे और दिन-रात दोनों समय में संचालित होंगे।

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भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी लंबी दूरी के स्वदेशी कामिकेज (वन-वे अटैक) ड्रोन विकसित करने के लिए एक परियोजना शुरू की है। यह ड्रोन भारतीय उद्योग के सहयोग से तैयार किए जाएंगे। वायु सेना ने वन-वे अटैक अनमैन्ड एरियल सिस्टम के लिए भारतीय कंपनियों के चयन हेतु सीमित टेंडर जारी किया है। यह कामिकेज ड्रोन परियोजना तमिलनाडु के कोयंबटूर के पास सुलूर स्थित 5 बेस रिपेयर डिपो द्वारा संभाली जाएगी, जिसे इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।

कामिकेज ड्रोन को ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ या ‘आत्मघाती ड्रोन’ भी कहा जाता है। ये एक तरफा (वन-वे) मानव रहित हवाई वाहन होते हैं, जो लक्ष्य क्षेत्र तक पहुंचकर दुश्मन की पहचान करते हैं और टकराकर विस्फोट कर देते हैं।

रक्षा मंत्रालय के फैसले के अनुसार, इस ड्रोन प्लेटफॉर्म के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स भारतीय वायु सेना के पास रहेंगे। इसे पूरी तरह भारत में ही घरेलू कंपनियों और स्टार्टअप्स की मदद से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया जाएगा।

इस परियोजना से जरूरत के अनुसार तेज अपग्रेड, बदलाव और अनुकूलन संभव होगा। आईएएफ के अनुसार, यह लंबी दूरी के कामिकाजे ड्रोन 16,000 फीट तक की ऊंचाई पर काम कर सकेंगे और दिन-रात दोनों समय में संचालित होंगे।

पहले नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि भारत को ड्रोन निर्माण में वैश्विक केंद्र बनने के लिए मिशन मोड में काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि यह रणनीतिक स्वतंत्रता और रक्षा तैयारी को मजबूत करने के लिए जरूरी है और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान-इजराइल तनाव तक हाल के संघर्ष दिखाते हैं कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की भूमिका बहुत अहम होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में ड्रोन निर्माण केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके हर हिस्से (कंपोनेंट) का निर्माण भी देश में होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “ड्रोन के मोल्ड्स से लेकर सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी तक सब कुछ भारत में ही बनना चाहिए। यह आसान काम नहीं है, क्योंकि कई देशों में ड्रोन के महत्वपूर्ण हिस्से अभी भी चीन से आयात किए जाते हैं।”

उन्होंने बताया कि भारत के रक्षा नवाचार इकोसिस्टम में स्टार्टअप्स और एमएसएमई की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। फरवरी 2026 तक इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स)पहल के तहत 676 स्टार्टअप्स, एमएसएमई और इनोवेटर्स जुड़े हैं और 548 कॉन्ट्रैक्ट साइन किए जा चुके हैं।

इनमें से 58 प्रोटोटाइप को खरीद के लिए मंजूरी मिली है, जिनकी कीमत लगभग 3,853 करोड़ रुपए है। इसके अलावा 45 खरीद अनुबंध भी लगभग 2,326 करोड़ रुपए के साइन हो चुके हैं।

 
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