आईएएनएस से बातचीत करते हुए महात्मा गांधी शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने कहा, “मैं सच में भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं। यह सब भगवान की कृपा और मेरे स्टूडेंट्स की वजह से हुआ है। कल शाम करीब 5:00-5:30 बजे मुझे एक कॉल आया जिसमें कहा गया, ‘मैम, प्लीज अपना ईमेल चेक करें।’
डॉ. अर्चना शुक्ला ने आगे कहा कि शिक्षिकाओं के अपने फैमिली स्ट्रगल्स होते हैं; इन सब को पार करते हुए जब इस स्तर पर कोई पहुंचता है तो सब को संदेश जाता है कि अगर मैं कर सकती हूं तो वे सब भी कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, “शिक्षकों को सम्मानित करने का केंद्र सरकार की ओर से ये जो अभियान चलाया जा रहा है, यह बहुत ही अच्छा है।
अर्चना शुक्ला ने आगे कहा कि हमारे पास कई राज्यों से ज्यादातर श्रमिक वर्ग से विद्यार्थी आते हैं; वे कई सारे संघर्ष को अपने साथ लेकर आते हैं। पिछले साल हमारी एक विद्यार्थी राष्ट्रपति से मिल पाईं। वो फर्स्ट जेनरेशन लर्नर है; इसके पहले उसके मां-बाप ने पढ़ाई नहीं की है।
अर्चना शुक्ला ने कहा कि ‘नेशनल टीचर्स अवॉर्ड’ किसी भी शिक्षक के लिए सपने जैसा होता है। यह देश के शिक्षकों के लिए सबसे बड़ा सम्मान है। यह एक लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड है, और हम सभी के लिए यह सौभाग्य है। इससे अब लोग हमारे विद्यालय को जानेंगे। आशा है कि सभी शिक्षकों के लिए यह प्रेरणा बनेगी।
