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Wednesday, October 14, 2026
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‘जीवित रहने तक लोगों की सेवा करना चाहता हूं’, अस्पताल से छुट्टी मिलने पर अन्ना हजारे!

उन्होंने कहा, "आज तक 90 साल की उम्र तक मैंने लोगों और देश की सेवा की है। अब भी 100 साल की उम्र तक सेवा जारी रखना चाहता हूं। सेवा का मतलब निस्वार्थ कर्म है।

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वरिष्ठ समाजसेवी और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रमुख चेहरे अन्ना हजारे को गुरुवार को बॉम्बे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उन्हें करीब 10 दिन पहले मूत्र संक्रमण की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अन्ना हजारे ने कहा कि उनका जीवन का एकमात्र उद्देश्य अंतिम सांस तक लोगों की सेवा करना है।

पत्रकारों से बातचीत में 90 वर्षीय अन्ना हजारे ने कहा, “अभी मेरी तबीयत ठीक है। स्वास्थ्य थोड़ा बिगड़ गया था, लेकिन अब पहले से बेहतर हूं। मेरी उम्र 90 साल हो गई है और मैं 100 साल पूरे करना चाहता हूं।”

उन्होंने कहा, “आज तक 90 साल की उम्र तक मैंने लोगों और देश की सेवा की है। अब भी 100 साल की उम्र तक सेवा जारी रखना चाहता हूं। सेवा का मतलब निस्वार्थ कर्म है। निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म भगवान की पूजा के समान है। पूजा सिर्फ मंदिर में नहीं होती, जनता की सेवा करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।”

अन्ना हजारे ने कहा, “जब तक जिंदा हूं, लोगों की सेवा करना चाहता हूं। मैंने अपना पूरा जीवन सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। मुझे अपने बैंक बैलेंस की कोई चिंता नहीं है। योजनाओं का लाभ मिलने के बावजूद मैंने अपने लिए कोई धन नहीं रखा। मेरे लिए धन-दौलत नहीं, बल्कि लोगों की सेवा ही सबसे बड़ा उद्देश्य है।”

वहीं, बॉम्बे अस्पताल के चिकित्सक डॉ. गौतम भंसाली ने बताया कि अन्ना हजारे पहले वायरल बुखार और दस्त की शिकायत के चलते शिरूर के एक अस्पताल में भर्ती हुए थे, जहां उनका उपचार हुआ था।

उन्होंने कहा, “वायरल बीमारी और गंभीर डिहाइड्रेशन की वजह से उन्हें पेशाब संबंधी दिक्कतें होने लगी थीं। उनका क्रिएटिनिन स्तर काफी बढ़ गया था, जिससे मूत्र संक्रमण हो गया। इसी कारण उन्हें आगे के इलाज के लिए बॉम्बे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।”

अन्ना हजारे के अस्पताल में भर्ती होने की खबर के बाद देशभर में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी।

अन्ना हजारे देश के प्रमुख समाज सुधारकों और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के अपने गांव रालेगण सिद्धि को जल संरक्षण, वनीकरण, ग्रामीण आत्मनिर्भरता और नशामुक्ति जैसे अभियानों के जरिए आदर्श गांव के रूप में विकसित किया।

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