अभ्यास के दौरान सैनिकों ने युद्धक निशानेबाजी, तेजी से स्थिति बदलकर फायरिंग करने और स्नाइपर फायरिंग का प्रशिक्षण लिया। इसमें खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में सैनिक कितनी तेजी से लक्ष्य पहचानते हैं और कितनी सटीकता से उसे निशाना बनाते हैं। इस अभ्यास का मकसद केवल निशानेबाजी में दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि दोनों देशों के विशेष बलों को मिलकर अभियान चलाने के लिए तैयार करना भी है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त प्रशिक्षण से सैनिकों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने, बेहतर तालमेल बनाने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने का अवसर मिलता है।
गौरतलब है कि संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान दोनों देशों के सैनिक अपने हथियारों, सैन्य उपकरणों और अभियान चलाने के तरीकों से जुड़ी जानकारी और अनुभव भी साझा कर रहे हैं। इससे उन्हें एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने और संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।
इस अभ्यास में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) के जवान कर रहे हैं। वहीं इंडोनेशिया की ओर से वहां के विशेष बलों के सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के विशेष बलों के बीच आपसी समझ, सहयोग और एक-दूसरे के साथ मिलकर अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत करना है।
‘गरुड़ शक्ति’ युद्धाभ्यास में दोनों देशों के जवान जंगल जैसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में विशेष अभियान चला रहे हैं। यहां अभियान की रणनीतियों और तकनीकों का अभ्यास भी किया जा रहा है। इसमें बाधाओं को पार करना, युद्ध के दौरान सटीक निशाना लगाना, पर्वतारोहण और हवाई हमले से जुड़ा प्रशिक्षण शामिल है। इसके साथ साथ सैनिकों की शारीरिक सहन शक्ति, कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता और युद्ध के लिए तैयारी को मजबूत करने वाले विशेष अभ्यास भी किए जा रहे हैं।



