स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के मुताबिक, ये मौतें बुधवार सुबह तक के पिछले 24 घंटों के दौरान दर्ज की गईं। समाचार एजेंसी यूएनबी (यूएनबी) की रिपोर्ट के अनुसार, हाल में हुई छह मौतों को संदिग्ध खसरा मामलों के रूप में दर्ज किया गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, खसरे से पुष्टि की गई मौतों की संख्या 105 पर बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1,164 हो गया है। डीजीएचएस ने बताया कि 24 घंटे के दौरान खसरे के 1,325 नए संदिग्ध मामले सामने आए। इसके बाद कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 2,34,148 हो गई है। इसी अवधि में 77 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए, जिससे कुल पुष्ट मामलों की संख्या 24,150 तक पहुंच गई।
पिछले महीने ‘द संडे गार्डियन’ से बातचीत में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खसरे की इस ‘महामारी’ के लिए सरकारी लापरवाही और दशकों पुराने टीकाकरण तंत्र के कमजोर पड़ने को जिम्मेदार ठहराया था।
हसीना ने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय लिए गए राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों के कारण वैक्सीन की खरीद प्रभावित हुई, जिससे टीकाकरण में बड़ा अंतर पैदा हो गया।
शेख हसीना ने मौजूदा तारीक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार की भी आलोचना की। उनका कहना था कि जब बीमारी की गंभीरता साफ दिखाई देने लगी, तब भी अधिकारियों ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
उन्होंने कहा, “एक ऐसी बीमारी से, जिसे रोका जा सकता है, एक हजार से ज्यादा बच्चों की मौत होना कोई सामान्य प्रशासनिक विफलता नहीं है।”
पूर्व प्रधानमंत्री ने वैक्सीन की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने, कमजोर और जोखिम वाले समुदायों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाने, रियल-टाइम बीमारी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, बच्चों के स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाने और वैक्सीन खरीद तथा टीकाकरण में हुई कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
वहीं, डीजीएचएस में रोग नियंत्रण विभाग के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद ने पिछले महीने कहा था कि अप्रैल में यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद दोबारा शुरू होने और आपातकालीन टीकाकरण अभियान चलाने के बावजूद महामारी को जल्द नियंत्रित करना आसान नहीं होगा।
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार के अनुसार, बीमारी के तेजी से फैलने की वजह से इसके प्रभाव को कम करने में अभी समय लग सकता है।



